नई शिक्षा नीति 2020 : अब स्थानीय भाषा में होगी स्कूली पढ़ाई, जानें क्यों है यह महत्वपूर्ण

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 01, 2020

बुधवार को केंद्र सरकार ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति  को मंजूरी दे दी है जिसके तहत स्कूल एजुकेशन से लेकर हायर एजुकेशन तक कई बड़े और अहम बदलाव किए गए हैं।  भारतीय शिक्षा नीति  में 34 साल बाद बदलाव किए गए हैं इसलिए यह काफी महत्वपूर्ण  है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्कूली पढाई से लेकर उच्च शिक्षा तक कई बदलाव किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों का पूर्ण रूप से विकास और उन्हें विश्व स्तर पर सशक्त बनाना है।  


नई  शिक्षा नीति में स्कूल पाठ्यक्रम के 10 + 2 ढांचे की जगह 5 + 3 + 3 + 4 का नया पाठयक्रम संरचना लागू किया जाएगा। इसके साथ ही शिक्षा नीति में किए गए बदलावों में मातृभाषा और स्थानीय भाषा को तव्वजो दी जाएगी।  सरकार ने सभी भारतीय भाषाओं  के संरक्षण, विकास और उन्हें मजबूत बनाने के लिए अब स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक भारतीय भाषाओं को शामिल करने की सिफारिश की है।  इसके साथ ही सभी भारतीय और प्राकृत भाषाओं के लिए एक राष्ट्रीय संस्थान, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ ट्रांसलेशन एंड इंटरप्रिटेशन (आईआईटीआई) की स्थापना करने की बात की है।  


स्कूली शिक्षा में मातृभाषा और स्थानीय भाषा को दी गई है अहमियत 


सरकार की योजना है कि स्कूली शिक्षा से उच्च शिक्षा तक भारतीय भाषाओं को शामिल किया जाए। इसमें इंजीनियरिंग और मेडिकल पढ़ाई भी शामिल है। नई शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा में अब त्रिभाषा फॉर्मूला चलेगा। इसमें संस्कृत के साथ तीन अन्य भारतीय भाषाओं का विकल्प होगा। इलेक्टिव में ही विदेशी भाषा चुनने की भी आजादी होगी। सरकार ने पाँचवी क्लास तक मातृभाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई का माध्यम रखने की योजना बनाई है, इसे क्लास आठ या उससे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।  विदेशी भाषाओं की पढ़ाई सेकेंडरी लेवल से होगी।  नीति में अलग-अलग भाषाओं पर ही जोर दिया गया है। हालांकि, नई शिक्षा नीति में यह भी कहा गया है कि किसी पर कोई भी भाषा थोपी नहीं जाएगी।  


क्यों है मातृभाषा ज़रूरी 

नई शिक्षा नीति में निचले स्तर की पढ़ाई के माध्यम के लिए  मातृभाषा/ स्थानीय भाषा के प्रयोग पर ज़ोर दिया गया है जिसका उद्देश्य बच्चों को उनकी मातृभाषा और संस्कृति से जोड़े रखते हुए उन्हें  शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाना है।  अपनी मातृभाषा/स्थानीय भाषा में बच्चे को पढ़ने में आसानी होगी और वह जल्दी सीख पाएगा।  छोटे बच्चे घर में बोले जाने वाली मातृभाषा या स्थानीय भाषा में जल्दी सीखते हैं, यदि स्कूल में भी मातृभाषा का प्रयोग होगा तो इसका ज़्यादा प्रभाव होगा और वे जल्दी सीख पाएंगे और उनका ज्ञान बढ़ेगा।  इसके साथ ही शिक्षा प्रणाली में भारतीय भाषाओं  को शामिल करने का एक उद्देश्य उन्हें सहेजना और मजबूत बनाना है।  शिक्षा में स्थानीय भाषा शामिल करने से लुप्त हो रही भाषाओं   को नया जीवनदान मिलेगा और बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़े रखने में मदद मिलेगी।

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