Social Media पर लगाम: Meta का 17 अरब डॉलर का Deal, अब Teen Safety के लिए लागू होंगे बेहद सख्त कानून

By Ankit Jaiswal | Aug 28, 2026

सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर अमेरिका में बड़ा फैसला सामने आया है। मेटा ने बुधवार, 26 अगस्त को 47 अमेरिकी राज्यों, वॉशिंगटन डीसी और कुछ अन्य क्षेत्रों की ओर से दायर मुकदमों को खत्म करने के लिए अगले दस वर्षों में 17 अरब डॉलर से अधिक देने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही कंपनी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर किशोरों के इस्तेमाल को लेकर कई सख्त बदलाव लागू करेगी।

समझौते के तहत शुरुआती पांच वर्षों में 18 वर्ष से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम पर रोजाना कुल दो घंटे की सीमा तय की जाएगी। हालांकि, निजी संदेश भेजने की सुविधा इस सीमा से बाहर रहेगी। सत्यापित अभिभावक इस समय सीमा में बदलाव कर सकेंगे।

किशोरों के लिए रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक मंच के ज्यादातर हिस्से बंद रहेंगे। रात 10 बजे से सुबह 7 बजे तक अधिकतर सूचनाएं बंद रहेंगी। स्कूल के दिनों में सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक भी सूचनाएं शांत रखी जाएंगी। निजी संदेश रात के प्रतिबंध के दौरान भी उपलब्ध रहेंगे।

गौरतलब है कि मेटा को केवल समय सीमा ही नहीं, बल्कि मंच की मूल संरचना में भी बदलाव करना होगा। किशोरों के लिए गैर-व्यक्तिगत सामग्री वाली फीड का विकल्प, पसंद और प्रतिक्रिया की संख्या को डिफॉल्ट रूप से छिपाना, सौंदर्य संबंधी बदलाव वाले फिल्टर पर रोक और उम्र की बेहतर पुष्टि जैसे उपाय शामिल हैं। अभिभावकीय नियंत्रण और हानिकारक सामग्री से बचाव के उपाय भी मजबूत किए जाएंगे।

इन बदलावों की जरूरत क्यों महसूस हुई, इसका अंदाजा दिसंबर 2025 के प्यू अध्ययन से लगाया जा सकता है। अध्ययन के मुताबिक अमेरिका में 36 प्रतिशत किशोर यूट्यूब, टिकटॉक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और फेसबुक में से कम से कम एक मंच का लगभग लगातार इस्तेमाल करते हैं।

इससे पहले मार्च में लॉस एंजिलिस की एक जूरी ने के.जी.एम. बनाम मेटा मामले में मेटा और गूगल को एक युवा उपयोगकर्ता के मानसिक स्वास्थ्य को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार मानते हुए 60 लाख डॉलर का हर्जाना तय किया था। ऐसे मामलों में अंतहीन सामग्री, सिफारिश प्रणाली, सूचनाएं और पसंद तथा देखे जाने की संख्या जैसे फीचर सवालों के घेरे में रहे हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, मेटा को समझौते के पालन की निगरानी के लिए पांच वर्षों तक एक स्वतंत्र लेखा परीक्षक नियुक्त करना होगा। उसे कंपनी के संबंधित दस्तावेजों, कर्मचारियों, प्रणालियों और आंकड़ों तक पहुंच मिलेगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पांच साल की निगरानी दस साल के समझौते की अवधि से छोटी है और असली सवाल यह रहेगा कि इन उपायों से किशोरों के स्वास्थ्य, नींद और आदतन इस्तेमाल पर वास्तव में कितना असर पड़ता है।

कॉमन सेंस मीडिया के रोबी टोर्नी का कहना है कि समय सीमा और रात के प्रतिबंध जैसे उपाय इसलिए अधिक प्रभावी हो सकते हैं क्योंकि वे पहले से लागू होंगे। वहीं, मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय की कैरोलिना रोसिनी ने इसे ऐसा महत्वपूर्ण कदम बताया है जिसमें कंपनी को केवल अपनी नीतियां बदलने के बजाय मंच की मूल बनावट बदलनी होगी।

बता दें कि यह समझौता मेटा के खिलाफ राज्यों के मुकदमे को खत्म करता है, लेकिन बच्चों और सोशल मीडिया से जुड़े हजारों दूसरे मामले अभी लंबित हैं। समझौते में यह भी कहा गया है कि इसे अन्य राज्यों या देशों में कानूनी मिसाल नहीं माना जाएगा।

इस समझौते का असर केवल मेटा तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। समझौते के तहत करीब 70 प्रतिशत राशि राज्यों को मिलेगी, जबकि बाकी 30 प्रतिशत राशि तभी जारी होगी जब यूट्यूब और टिकटॉक भी किशोरों के लिए इसी तरह के सुरक्षा उपाय अपनाएं और भुगतान करें। अगर प्रमुख मंचों पर ऐसे नियम लागू होते हैं तो प्रत्येक मंच पर रोजाना उपयोग की सीमा घटकर 60 मिनट तक की जा सकती है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि किशोर एक ही मंच तक सीमित नहीं रहते। ऐसे में केवल एक कंपनी पर प्रतिबंध लगाने से उपयोगकर्ता दूसरे मंच की ओर जा सकते हैं। इसलिए वास्तविक चुनौती ऐसे नियम बनाने की है जो बच्चों की नींद, मानसिक स्वास्थ्य, समय और वास्तविक जीवन के संबंधों को सभी प्रमुख सामाजिक मंचों पर बेहतर तरीके से सुरक्षित कर सकें।

प्रमुख खबरें

Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ से 547 की मौत, 320 भारतीय लापता और सीमा पर फंसे कई नागरिक

Imran Khan के समर्थन में उतरे Pat Cummins, Greg Chappell और Sunil Gavaskar ने भी उठाई आवाज

CM Yogi Adityanath बोले: युवाओं के पास सरकारी नौकरी के अलावा स्टार्टअप और उद्यमिता के भरपूर अवसर

WFI ने जारी किए सख्त Anti Doping दिशानिर्देश, पहलवानों को दी कड़ी चेतावनी