By रेनू तिवारी | Feb 10, 2026
अगर आप वेलेंटाइन डे के मौके पर एक प्यारी सी रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म देखने की उम्मीद में ‘रिलेशनशिप गोल्स’ शुरू कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। यह फिल्म कम और एक 'कॉर्पोरेट-धार्मिक विज्ञापन' ज्यादा है। यह फिल्म उस हद तक जाती है जहाँ मनोरंजन गौण हो जाता है और एक खास किताब का प्रचार मुख्य उद्देश्य बन जाता है।
कहानी लिया काल्डवेल (केली रॉलैंड) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक मॉर्निंग शो की सफल निर्माता है। उसे शो-रनर बनने की उम्मीद है, लेकिन उसकी राह में उसका पूर्व प्रेमी जारेट रॉय (मेथड मैन) आ जाता है। जारेट वही शख्स है जिसने उसे धोखा दिया था। अब दोनों को वेलेंटाइन डे के एक विशेष सेगमेंट पर साथ काम करना है। यहाँ तक तो सब एक सामान्य रॉम-कॉम (Rom-com) जैसा लगता है, लेकिन असली खेल इसके बाद शुरू होता है।
जैसे ही कहानी आगे बढ़ती है, फिल्म पूरी तरह से पादरी माइकल टॉड और उनकी किताब 'Relationship Goals: How to Win at Dating, Marriage, and Sex' का प्रचार करने लगती है। जारेट का दावा है कि इस किताब ने उसकी जिंदगी बदल दी और उसे एक बेहतर इंसान बना दिया।
यह फिल्म आपको 'थिंक लाइक अ मैन' (Think Like a Man) और 'व्हाट टू एक्सपेक्ट व्हेन यू आर एक्सपेक्टिंग' जैसी फिल्मों की याद दिला सकती है। वे फिल्में भी सेल्फ-हेल्प किताबों पर आधारित थीं और औसत दर्जे की थीं, लेकिन उनमें कम से कम 'शर्म' बची थी। वे इस कदर विज्ञापन की तरह नहीं लगती थीं। 'रिलेशनशिप गोल्स' को देखकर ऐसा लगता है जैसे हम भविष्य की उन फिल्मों की ओर बढ़ रहे हैं जिनका शीर्षक होगा— "प्रोग्रेसिव इंश्योरेंस की 'फ्लो' कहती है कि होम और ऑटो इंश्योरेंस बंडल करें और पैसे बचाएं।" यह मनोरंजन नहीं, बल्कि एक कॉर्पोरेट एजेंडा है जिसे कहानी के नाम पर परोसा जा रहा है।
अक्सर कहा जाता है कि पर्दे पर खुद का किरदार निभाना सबसे कठिन होता है, लेकिन मेगाचर्च पादरी, लेखक और यूट्यूब सनसनी माइकल टॉड ने इसे बेहद आसान बना दिया है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि एक 'इन्फोर्मर्शियल' (विज्ञापनी फिल्म) में खुद का किरदार निभाना कितना सरल है। उनके हाव-भाव और बोलने का तरीका किसी अभिनेता जैसा नहीं, बल्कि एक ऐसे सेल्समैन जैसा है जो आपको स्वर्ग का रास्ता बेचने की कोशिश कर रहा है।
फिल्म की टैगलाइन कहती है कि पादरी साहब आपको "सेक्स में जीत हासिल करना" (How to win at sex) सिखाएंगे- चाहे इसका जो भी मतलब हो। लेकिन विडंबना देखिए, फिल्म में न तो ऐसा कुछ दिखाया गया है और न ही इस पर कोई गंभीर बात की गई है। पादरी माइकल टॉड अपनी किताब तो बेचना चाहते हैं, लेकिन फिल्म की सामग्री में उस 'मसाले' या गहराई की भारी कमी है जिसका वादा वह अपनी किताब के कवर पर करते हैं। यह पाखंड (Hypocrisy) की पराकाष्ठा है।
'रिलेशनशिप गोल्स' उतनी ही सूक्ष्म है जितना कि किसी चर्च में शांति के बीच एक शोरगुल वाली घटना। माइकल टॉड का प्रस्तुतीकरण किसी रॉक-कंसर्ट से कम नहीं है, जहाँ धुएँ की मशीनें और ऊंची आवाजें आपको सोचने का मौका ही नहीं देतीं। उनके संवाद जैसे- "आप फेसबुक पर वफादारी या इंस्टाग्राम पर ईमानदारी नहीं पा सकते"—सुनने में अच्छे लग सकते हैं, लेकिन ये सिर्फ आकर्षक शब्दों में लिपटे हुए 'सांप के तेल' (Snake Oil) की तरह हैं। उनका 'अर्थशेकिंग' प्रवचन इतना नाटकीय है कि एक नास्तिक व्यक्ति भी खुद को इस कचरे से बचाने के लिए प्रार्थना करने लगेगा।
हम सभी अपनी जिंदगी काटने के लिए किसी न किसी दर्शन का सहारा लेते हैं—चाहे वह बाइबिल पढ़ना हो या जिम में गाने सुनना। लेकिन यह फिल्म बहुत ही दयनीय तरीके से एक विज्ञापन को रॉम-कॉम के पीछे छिपाने की कोशिश करती है। इसमें वही पुराने घिसे-पिटे तरीके अपनाए गए हैं: लड़की और उसकी सहेलियों का डांस, मुख्य किरदारों के बीच प्यार-नफरत का ड्रामा और मजाकिया नोकझोंक। लेकिन विज्ञापन के लालच ने इन क्लिशे (Cliches) को भी बेजान बना दिया है।
जब फिल्म का मकसद केवल 'कंटेंट' बेचना हो (चाहे वो किताब हो या यूट्यूब वीडियो), तो वहां कहानी की नवीनता के लिए कोई जगह नहीं बचती। फिल्म में बार-बार दिखाया जाता है कि कैसे लोग दफ्तरों और लॉबियों में काम छोड़कर माइकल टॉड का इंटरव्यू मंत्रमुग्ध होकर देख रहे हैं। यहाँ तक कि मुख्य किरदार लिया (Leah), जो अपने धोखेबाज एक्स-बॉयफ्रेंड से नफरत करती थी, वह भी माइकल टॉड के 'शब्दों की शक्ति' से पिघलने लगती है। यह पूरी तरह से बेशर्मी है।
केली रॉलैंड और मेथड मैन जैसे शानदार कलाकारों का होना भी इस फिल्म को बचा नहीं पाता। उनकी आपसी केमिस्ट्री ठीक है, लेकिन स्क्रिप्ट इतनी कमजोर और एजेंडा-संचालित है कि उनके पास करने के लिए कुछ खास नहीं बचता। फिल्म के अन्य किरदार जैसे ट्रेसी (एनी गोंजालेज) और ब्रेंडा (रॉबिन थेड) केवल "ईश्वर की योजना" और "किताब के ज्ञान" की बातें करने के लिए रखे गए हैं।
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी किसी फिल्म की तरह नहीं, बल्कि एक हाई-बजट विज्ञापन जैसी लगती है। किचन के सामान से लेकर स्नैक फूड तक, हर ब्रांड के लोगो को इतनी बारीकी से फोकस किया गया है कि दर्शक खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं।
देखें या छोड़ें? (Stream It or Skip It?)
फैसला: बिल्कुल छोड़ दें (SKIP IT)
यह फिल्म सिनेमा के नाम पर एक भद्दा मजाक है। यदि आप माइकल टॉड के भक्त हैं या उनकी किताब खरीदना चाहते हैं, तो शायद आपको यह पसंद आए। लेकिन एक सामान्य दर्शक के लिए यह 93 मिनट का उबाऊ और थोपा हुआ विज्ञापन है।
मूवी रिव्यू: ‘रिलेशनशिप गोल्स’ – फिल्म या 90 मिनट का विज्ञापन?
प्लेटफ़ॉर्म: अमेज़न प्राइम वीडियो
कलाकार: केली रॉलैंड, क्लिफ "मेथड मैन" स्मिथ, माइकल टॉड
रेटिंग: (2/5)