By डॉ. अनिमेष शर्मा | Mar 24, 2026
कैब से सफर करने वाले यात्रियों के लिए, खासकर महिलाओं के लिए, सरकार ने एक अहम और दूरगामी कदम उठाया है। जल्द ही ओला, उबर और रैपिडो जैसे कैब एग्रीगेटर एप्स में यात्रियों को सेम जेंडर ड्राइवर चुनने का विकल्प मिलेगा। यानी महिला यात्री चाहें तो अपनी राइड के लिए महिला ड्राइवर को प्राथमिकता दे सकेंगी। इसके साथ ही ट्रिप पूरी होने के बाद ड्राइवर को सीधे टिप देने की सुविधा भी दी जाएगी, जिसकी पूरी राशि ड्राइवर को ही मिलेगी। यह बदलाव मोटर व्हीकल एग्रीगेटर्स गाइडलाइंस, 2025 में किए गए संशोधनों का हिस्सा है, जिसे केंद्र सरकार ने जारी किया है और राज्यों से इसे लागू करने को कहा गया है।
सरकारी नोटिफिकेशन में इस नियम की कोई स्पष्ट प्रभावी तारीख नहीं बताई गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि यह नियम नोटिफिकेशन जारी होने की तारीख से ही प्रभावी है। जब जुलाई 2025 में मोटर व्हीकल एग्रीगेटर्स की मूल गाइडलाइंस जारी की गई थीं, तब राज्यों को इन्हें लागू करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था। संशोधित नियमों के लिए भी कुछ ऐसा ही समय दिया जा सकता है, हालांकि अभी कोई फिक्स्ड टाइमलाइन घोषित नहीं की गई है।
यह गाइडलाइंस केंद्र सरकार की ओर से जारी की गई हैं, लेकिन इन्हें जमीन पर लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी। राज्य सरकारें इन संशोधनों को अपनी लाइसेंसिंग प्रक्रिया में शामिल करेंगी। कैब एग्रीगेटर कंपनियों को अपने एप्स में तकनीकी बदलाव करने होंगे। उदाहरण के तौर पर, क्लॉज 15.6 के तहत एप में सेम जेंडर ड्राइवर चुनने का फीचर जोड़ना होगा। लाइसेंस बनाए रखने या रीन्यू कराने के लिए इन नियमों का पालन अनिवार्य होगा। नियमों की अनदेखी करने पर कंपनी का लाइसेंस सस्पेंड या रद्द भी किया जा सकता है।
हालांकि व्यावहारिक रूप से एप अपडेट और सिस्टम बदलाव में कुछ समय लग सकता है, लेकिन अनुपालन अनिवार्य रहेगा।
सरकार के इस फैसले को लेकर इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने कुछ व्यावहारिक चुनौतियों की ओर भी इशारा किया है। कैब एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल देश में कुल कैब ड्राइवरों में महिलाओं की हिस्सेदारी 5% से भी कम है।
ऐसे में सेम जेंडर ड्राइवर का विकल्प देना ऑन-डिमांड सर्विस की प्रकृति को प्रभावित कर सकता है। महिला ड्राइवरों की सीमित संख्या के कारण बुकिंग के समय वेटिंग टाइम बढ़ सकता है, खासकर लेट नाइट में जब डिमांड ज्यादा और ड्राइवरों की उपलब्धता कम होती है। फिलहाल उबर, ओला और रैपिडो ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
नई गाइडलाइंस में टिपिंग सिस्टम को भी ज्यादा पारदर्शी बनाया गया है। अब यात्री अपनी इच्छा से ड्राइवर को टिप दे सकेंगे, लेकिन इसके लिए कुछ साफ नियम तय किए गए हैं।
- सफर के बाद ही टिप: टिप देने का विकल्प सिर्फ ट्रिप पूरी होने के बाद ही उपलब्ध होगा। बुकिंग के समय या सफर के दौरान यह ऑप्शन नहीं दिखेगा।
- कोई कटौती नहीं: यात्री जितनी भी टिप देगा, उसकी पूरी राशि ड्राइवर को मिलेगी। कंपनियां इसमें से कोई कमीशन नहीं काट सकेंगी।
- भ्रामक तरीके पर रोक: कंपनियां टिप के लिए किसी भी तरह के भ्रामक या दबाव बनाने वाले तरीके का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी, जो कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के खिलाफ हो।
सेम जेंडर ड्राइवर और पारदर्शी टिपिंग जैसे बदलाव कैब इंडस्ट्री में एक नए युग की शुरुआत माने जा सकते हैं। जहां एक ओर इससे यात्रियों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर कंपनियों के लिए इसे प्रभावी ढंग से लागू करना एक बड़ी चुनौती भी होगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकारें और कैब एग्रीगेटर्स इन नियमों को कितनी तेजी और गंभीरता से अपनाते हैं।
- डॉ. अनिमेष शर्मा