By अभिनय आकाश | Jun 04, 2026
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और राजनीतिक झटका लगा है, क्योंकि उनके करीबी माने जाने वाले कृष्णा चक्रवर्ती ने बिधाननगर नगर निगम के महापौर पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर गहरे संकट के दौर में आया है, जो एक बड़े आंतरिक विद्रोह और अभूतपूर्व विभाजन का सामना कर रही है। पार्टी ने अपने विधायकों के एक बड़े वर्ग का समर्थन खो दिया है, क्योंकि उसके 80 विधायकों में से 60 विधायक ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट का समर्थन कर रहे हैं। इस बागी गुट को विधानसभा अध्यक्ष से मान्यता मिल चुकी है।
टीएमसी नेता ऋतब्रता बनर्जी राजनीतिक संकट के केंद्र में आ गए हैं। कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद और वफादार सहयोगियों में गिने जाने वाले ऋतब्रता बनर्जी कथित तौर पर पार्टी से अलग हो गए। यह पूरा विवाद विपक्ष के नेता के चुनाव के प्रस्ताव पर जाली हस्ताक्षरों के आरोपों के बाद शुरू हुआ। इस मुद्दे पर सवाल उठाने के बाद ऋतब्रता बनर्जी और संदीपान साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद, महज दो दिनों के भीतर ऋतब्रता ने पार्टी की पूरी संरचना को ध्वस्त कर दिया। विधानसभा की दो-तिहाई से अधिक संख्या यानी 58 विधायकों का समर्थन हासिल करके ऋतब्रता ने ममता बनर्जी को उनके पूरे राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा झटका दिया है।
व्यापक रूप से यह माना जाता है कि टीएमसी के विखंडन का मुख्य कारण अभिषेक बनर्जी हैं। टीएमसी विधायक अरुणावा सेन ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उन्हें अभिषेक की "तानाशाही" कार्यशैली से आपत्ति है। हालांकि ममता बनर्जी अभी भी पार्टी की नेता हैं, लेकिन कई विधायक अभिषेक से नाखुश हैं। रितब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में 17 मौजूदा मुस्लिम विधायकों के शामिल होने से पार्टी को बड़ा झटका लगा है। नए गठबंधन में उनकी अहमियत को रेखांकित करते हुए, रितब्रता ने दलबदलू विधायकों में से एक, अखारुज्जमान को बागी गुट का मुख्य सचेतक नियुक्त किया है।