संकल्प एक योजना है (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Aug 21, 2021

संकल्प योजना ठोक बजाकर लागू करने के लिए संकल्प और संकल्प  दिलाए जाने लगे तो निवेदन आया कि संकल्प लेने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन देर तक खड़े होने से थकावट होती है। संकल्प दिलाने वाले देर से आते हैं इसलिए बैठने का इंतजाम होना चाहिए। पीने का पानी तो मिलना ही चाहिए। पहले परेशानी होती थी पीने का पानी पैक्ड नहीं मिलता था। अब तो संकल्प समारोह प्रायोजित करने के लिए कई पार्टियां पैसे को पानी पानी करने को तैयार रहती हैं। सलाह उचित थी, संकल्प दिलाने से पहले अच्छे प्रबंध का संकल्प लेना ज़रूरी है। 

यह मांग अबुद्धिजीवियों को भी अवांछित लगी और संकल्प के कार्यक्रम का प्रारूप बदलने का संकल्प लिया गया। सामूहिक रूप से संकल्प लेना ज़्यादा मुश्किल होता जा रहा था। संकल्प दिलाने वालों ने संकल्प लिया कि अब सभी को बिना कुछ दिए सिर्फ संकल्प देना और लेने वालों को बिना कुछ लिए सिर्फ संकल्प लेना ज़रूरी हो जाएगा। ऑनलाइन संकल्प देने बारे भी विचार होने लगा। ऐसा निश्चय करने से सब एकदम अनुशासन में आ गया। वैसे भी संकल्प तो मन ही मन लेना होता है। सबके सामने ढोंगदार ढंग से लंबा संकल्प कागज़ पढ़कर लिया और कागज़ पढ़वाकर दिलाया जाता है। सार्वजनिक रूप से संकल्प ले रहे होते हैं तो ज़बान से बोलना पड़ता है लेकिन कितनी ही बार दिमाग स्वीकृत नहीं करता।

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अनेक बार पता नहीं चलता कि संकल्प लिया गया या वास्तव में एक औपचारिकता निभाई गई। कई संकल्प वातानुकूलित कमरों में किए और कराए जाते हैं। फिर संकल्प लेने वाले लोगों की तादाद बढ़ जाए तो मैदान में करवाए जाते हैं। इन संकल्पों में जाति, धर्म और धन, राजनीति के वस्त्र पहनकर ज़ोरदार व शोरदार तरीके से प्रवेश करता है। कई नए संकल्प लेने के लिए अपने नहीं दूसरों की पसंद के नए कपड़े सिलवाने होते हैं। अनेक बार ख़ास रंग के वस्त्रों में संकल्प लिया जाता है और इन संकल्पों से जीने और मरने का ढंग बदल दिया जाता है। जूते पहनकर या उतारकर अलग अलग तरह के संकल्प लिए जाते रहे हैं। बाथरूम में नहाते हुए अनेक संकल्प लिए और साथ साथ धो दिए जाते हैं।

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जब एक के बाद एक संकल्प लेने से दर्जनों संकल्प दिमाग में जमा हो जाएं तो बंदा परेशान हो जाता है। उसका समझदार दिमाग संकल्पों को भुलाने के लिए शांत मन से एक दृढ़ संकल्प लेता है और क्षण भर में निर्मल आनंद प्राप्त करता है। इस तरह संकल्प योजना ठोक बजाकर लागू कर दी जाती है।

संतोष उत्सुक

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