By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 29, 2021
‘‘वाटर प्लस सिटी’’ यानी ऐसा शहर जहां बिना ‘‘ट्रीटमेंट’’ (प्रशोधन) के गंदा पानी किसी सार्वजनिक जल स्त्रोत में नहीं डाला जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘यहां के नागरिकों ने खुद आगे आकर अपनी नालियों को सीवर लाइन से जोड़ा है। स्वच्छता अभियान भी चलाया है और इस वजह से सरस्वती और कान्हा नदियों में गिरने वाला गन्दा पानी भी काफी कम हुआ है और सुधार नज़र आ रहा है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब देश आजादी का ‘‘अमृत महोत्सव’’ मना रहा है तो देश को यह याद रखना है कि ‘‘स्वच्छ भारत अभियान के संकल्प को हमें कभी भी मंद नहीं पड़ने देना है’’। उन्होंने कहा कि देश में जितने ज्यादा शहर ‘‘वाटर प्लस सिटी’’ होंगे, उतनी ही स्वच्छता भी बढ़ेगी, नदियां भी साफ होंगी और पानी बचाने की एक मानवीय जिम्मेदारी निभाने के संस्कार भी विकसित होंगे। मधुबनी जिले के डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय और वहां के स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र के संयुक्त प्रयासों से आरंभ किए गए ‘‘सुखेत मॉडल’’ का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका लाभ किसानों को तो हो ही रहा है, इससे स्वच्छ भारत अभियान को भी नई ताकत मिल रही है। प्रधानमंत्री के मुताबिक ‘‘सुखेत मॉडल’’ का मकसद गांवों में प्रदूषण कम करना है और इसके तहत गांव के किसानों से गोबर और खेतों–घरों से निकलने वाला अन्य कचरा इकट्ठा किया जाता है और बदले में गांव वालों को रसोई गैस सिलेंडर के लिए पैसे दिये जाते हैं। उन्होंने बताया कि जो कचरा गांव से एकत्रित होता है, उसके निपटारे के लिए वर्मी कम्पोस्ट (केंचुओं की मदद से कचरे को खाद में परिवर्तित करना) बनाने का भी काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘सुखेत मॉडल के चार लाभ तो सीधे-सीधे नजर आते हैं।