By Prabhasakshi News Desk | Feb 04, 2025
पुणे । मणिपुर में जातीय हिंसा से प्रभावित लोगों की दुर्दशा से आहत होकर भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल ने विधवाओं को आजीविका कमाने में मदद करने और संघर्ष से प्रभावित बच्चों की शिक्षा के लिए धन जुटाने के लिए एक अभियान शुरू किया है। पुणे में पिछले माह सेना दिवस परेड के अवसर पर ले. कर्नल एल. मनोंगबा (सेवानिवृत्त) को इस पहल के लिए सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी द्वारा ‘वेट्रन अचीवर’ पुरस्कार से सम्मानित किया था।
वह पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के 56 वें कोर्स के 1979 कैडर के अधिकारी रहे और सशस्त्र बलों से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने खुद को मणिपुर के पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। बाद में उन्होंने अपने सहपाठियों और मित्रों की मदद से ‘विंग्स ऑफ होप’ नाम के एक धर्मार्थ गैर-लाभकारी संगठन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य उत्तर-पूर्वी राज्य में जारी हिंसा से प्रभावित विधवाओं और बच्चों का उत्थान करना था।
ट्रस्ट के गठन के बाद उनकी टीम ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविरों का दौरा करना शुरू किया। ‘विंग्स ऑफ होप’ ने दो प्रमुख योजनाएं शुरू कीं - बच्चों की शिक्षा के लिए धन मुहैया कराना और विधवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में सहायता करना। उन्होंने बताया कि 60 बच्चों की शिक्षा जारी रखने के लिए वित्तपोषण किया गया जबकि 35 विधवाओं को ऋण उपलब्ध करवाकर विभिन्न उद्यमों से जोड़ा गया।