विद्युत संशोधन विधेयक: आरके सिंह ने ममता से पूछा- वितरण के क्षेत्र में निजी एकाधिकार का संरक्षण क्यों करना चाहती हैं?

By अंकित सिंह | Sep 15, 2021

विद्युत संशोधन विधेयक 2021 को लेकर एक बार फिर से मोदी सरकार और ममता बनर्जी आमने-सामने है। हाल में ही ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विद्युत संशोधन विधेयक को लेकर एक पत्र लिखा था और इस योजना का विरोध किया था। ममता ने नए संशोधनों को जन विरोधी करार दिया था। इसी को लेकर अब केंद्रीय बिजली मंत्री आरके सिंह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखा है। इस पत्र में विद्युत संशोधन विधेयक 2021 का विरोध करने पर ममता की मंशा को लेकर उन्होंने संदेह जताया है।

क्या है विद्युत संशोधन विधेयक 2021

विधेयक मानसून सत्र के दौरान संसद में पेश किये जाने को लेकर सूचीबद्ध था लेकिन इसे पेश नहीं किया गया। विधेयक में देश में बिजली वितरण कारोबार को लाइसेंस मुक्त करने का प्रावधान किया गया है। एक बार विधेयक के कानून बन जाने पर, बिजली वितरण को लाइसेंस से मुक्त कर दिया जाएगा और उपभोक्ताओं के पास दूरसंचार क्षेत्र की तरह बिजली आपूर्ति सेवा प्रदाताओं को चुनने का विकल्प होगा। विधेयक का उद्देश्य बिजली वितरण क्षेत्र में निजी और सरकारी एकाधिकार को समाप्त करना है। मंत्री ने पत्र में यह भी कहा है कि प्रस्तावित विधेयक के अमल में आने के बाद भी एक के बल पर दूसरे को सब्सिडी (क्रास सब्सिडी) की व्यवस्था बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति के लिये एक क्षेत्र में एक से अधिक सेवा प्रदाता कोई नया नहीं है। यह मुंबई में पहले से है। सिंह ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल राज्य विद्युत वितरण कंपनी की बिल को लेकर दक्षता केवल 81.43 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय औसत 85.36 प्रतिशत है। कुल तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान 20.40 प्रतिशत है।

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