By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 11, 2026
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के अध्यक्ष विवेक भीमन्वार के इस्तीफे की मांग को लेकर पुणे में जारी आंदोलन और तेज हो सकता है, क्योंकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (राकांपा-शप) के विधायक रोहित पवार ने महाराष्ट्र सरकार से रविवार शाम तक अपना रुख साफ करने को कहा है। अभ्यर्थी भीमन्वार के इस्तीफे और एमपीएससी में सुधार की मांग को लेकर पुणे में एसएम जोशी पुल पर पिछले दस दिन से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। पवार ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘आगे की कार्रवाई की घोषणा रविवार शाम को की जाएगी।’’ पुणे पुलिस ने बिना इजाजत विरोध-प्रदर्शन करने, यातायात में रुकावट डालने और निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के आरोप में आंदोलन के 15 प्रतिनिधियों के खिलाफ दो दिन पहले मामला दर्ज किया था।
पवार ने दावा किया कि इस मुद्दे से लगभग 25 लाख छात्र सीधे या परोक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से आग्रह किया कि वह ‘‘एमपीएससी अध्यक्ष भीमन्वार के साथ अपनी दोस्ती से ऊपर उठकर’’ अभ्यर्थियों की चिंताओं को प्राथमिकता दें। पवार ने कहा, ‘‘प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों ने आयोग में सुधार के लिए प्रस्तावित बदलावों का एक मसौदा सौंपा है और छात्रों ने इस दस्तावेज का समर्थन किया है।’’ उन्होंने सरकार पर प्रदर्शनकारियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया, क्योंकि उनमें से कई गरीब परिवारों से हैं।
पवार ने कहा कि अगर छात्र, उनके परिवार के सदस्य और अन्य नागरिक बड़ी संख्या में इसमें शामिल होते हैं, तो आंदोलन एक अलग मोड़ ले सकता है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता गोपीचंद पडलकर की आलोचना का जवाब देते हुए पवार ने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल छात्रों को ‘‘अर्बन नक्सल’’, ‘‘इंटेलेक्चुअल नक्सल’’ और विरोध-प्रदर्शन के लिए पैसे लेने वाले लोग कहा गया। राकांपा (शप) के नेता ने सत्ताधारी पक्ष पर आंदोलन का मजाक उड़ाने और उसे महज एक तमाशा बताने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि ऐसी बातें गरीब छात्रों, किसानों और खेतिहर मजदूरों के बच्चों का मजाक उड़ाने के बराबर हैं। पवार ने कहा कि एमपीएससी अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए फडणवीस जिम्मेदार हैं और उन्हें इस मामले में फैसला लेने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांग है कि आयोग में सुधार के लिए बनाई जाने वाली समिति में एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंडे जैसे काबिल अधिकारियों को शामिल किया जाए।
पवार ने आयोग के कामकाज की व्यापक जांच की मांग करते हुए कहा कि इसके चौकीदार से लेकर अध्यक्ष तक, सभी की जांच होनी चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में सूखे के हालात के बावजूद किसानों, खेतिहर मजदूरों और छात्रों को आर्थिक मदद न मिलने को लेकर राज्य सरकार की आलोचना भी की।