आरएसएस प्रमुख भागवत का ट्रंप के टैरिफ पर वार, बोले- स्वदेशी अपनाकर आत्मनिर्भर बनें

By अंकित सिंह | Oct 02, 2025

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को नागपुर में अपने विजयदशमी भाषण के दौरान अमेरिका द्वारा लागू की गई टैरिफ नीति की आलोचना की। आरएसएस प्रमुख ने स्वदेशी पर अधिक भरोसा करने का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा लागू की गई नई टैरिफ नीति उनके अपने हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी। लेकिन इससे सभी प्रभावित होते हैं... दुनिया एक-दूसरे पर निर्भर होकर चलती है; किन्हीं भी दो देशों के बीच संबंध इसी तरह कायम रहते हैं। कोई भी देश अलग-थलग नहीं रह सकता। यह निर्भरता मजबूरी में नहीं बदलनी चाहिए... हमें स्वदेशी पर भरोसा करने और आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है... फिर भी अपने सभी मित्र देशों के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखने का प्रयास करें, जो हमारी इच्छा से और बिना किसी मजबूरी के होंगे।

भागवत ने कहा कि जब समाज में विविध मान्यताओं वाले कई लोग एक साथ रहते हैं, तो समय-समय पर कुछ शोर और अराजकता हो सकती है। इसके बावजूद, यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नियम-कानूनों के साथ-साथ सद्भाव का उल्लंघन न हो। कानून को अपने हाथ में लेना, सड़कों पर उतरना और हिंसा और गुंडागर्दी का सहारा लेना सही नहीं है। किसी विशेष समुदाय को भड़काने की कोशिश करना और शक्ति प्रदर्शन करना, ये सब पूर्व नियोजित षड्यंत्र हैं।

आरएसएस प्रमुख ने महात्मा गांधी को भी उनकी जयंती पर याद किया। अपने वार्षिक विजयादशमी भाषण में भागवत ने कहा, "आज महात्मा गांधी की जयंती है। वे न केवल हमारी स्वतंत्रता के लिए लड़ने वालों में अग्रणी थे, बल्कि उन लोगों में भी उनका विशेष स्थान है जिन्होंने भारत के स्वत्व पर आधारित स्वतंत्रता के बाद के भारत की कल्पना की थी।" भागवत ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और राष्ट्र के प्रति उनकी भक्ति, समर्पण और सेवा पर प्रकाश डाला।

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उन्होंने कहा, "आज पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की भी जयंती है, जो सादगी, विनम्रता, सत्यनिष्ठा और दृढ़ संकल्प के प्रतीक थे और जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया।" भागवत ने आगे कहा, "वे हमारे लिए राष्ट्र के प्रति समर्पण, समर्पण और सेवा के अनुकरणीय प्रतीक हैं। वे हमें सिखाते हैं कि कैसे एक व्यक्ति सच्चे अर्थों में मानव बन सकता है और उसके अनुसार जीवन जी सकता है।"

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