Jan Gan Man: RSS ने जनसंख्या नियंत्रण कानून की जरूरत बताई, क्या NDA के घटक दल इस पर हाँ करेंगे?

By नीरज कुमार दुबे | Jul 10, 2024

देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। बताया जा रहा है कि देश में कुल 800 जिलों में से 200 जिलों का जनसांख्यिकी अनुपात बिगड़ गया है जिससे आने वाले समय में देश के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। इस बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी पत्रिका ऑर्गेनाइजर ने देश के कुछ इलाकों में मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ ‘जनसांख्यिकीय असंतुलन’ बढ़ने का दावा करते हुए कहा है कि एक व्यापक राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण नीति की जरूरत है। हम आपको बता दें कि ‘ऑर्गेनाइजर’ साप्ताहिक के ताजा अंक में प्रकाशित संपादकीय में जनसंख्या के लिहाज से क्षेत्रीय असंतुलन पर चिंता जताते हुए नीतिगत हस्तक्षेप की वकालत की गई है। पत्रिका में लिखा गया है कि पश्चिम और दक्षिण के राज्य जनसंख्या नियंत्रण उपायों को लागू करने में अपेक्षाकृत बेहतर काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें जनगणना के बाद आबादी में बदलाव होने पर संसद में कुछ सीट कम होने का डर है। संपादकीय के अनुसार, ‘‘राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या स्थिर होने के बावजूद, यह सभी धर्मों और क्षेत्रों में समान नहीं है। कुछ क्षेत्रों, खासकर सीमावर्ती जिलों में मुस्लिम आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।’’

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वैसे यहां सवाल उठता है कि जब जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर कोई कानून भाजपा ने स्पष्ट बहुमत रहते हुए नहीं बनाया तो क्या अब गठबंधन सरकार रहते हुए वह इस दिशा में कोई कदम उठायेगी? देखा जाये तो गंभीर होती इस समस्या के निदान के लिए एनडीए के सभी नेताओं को साथ बैठ कर इसका हल निकालना चाहिए लेकिन सवाल यह है कि क्या वोट बैंक की राजनीति से प्रभावित एनडीए के कुछ घटक यह हिम्मत दिखा पाएंगे? 

जहां तक ऑर्गेनाइजर के संपादकीय में उठाये गये अन्य गंभीर मुद्दों की बात है तो आपको बता दें कि इसमें आरोप लगाया गया है, ‘‘राहुल गांधी जैसे नेता यदा-कदा हिंदू भावनाओं का अपमान कर सकते हैं। (पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री) ममता (बनर्जी) इस्लामवादियों द्वारा महिलाओं पर किए गए अत्याचारों को स्वीकार करते हुए भी मुस्लिम कार्ड खेल सकती हैं और द्रविड़ पार्टियां सनातन धर्म को गाली देने में गर्व महसूस कर सकती हैं, क्योंकि उन्हें जनसंख्या असंतुलन के कारण विकसित तथाकथित अल्पसंख्यक वोट बैंक के एकजुट होने पर भरोसा है।’’ संपादकीय में कहा गया है, ‘‘विभाजन की विभीषिका और पश्चिम एशियाई और अफ्रीकी देशों से राजनीतिक रूप से सही, लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से गलत विस्थापन से सीख लेते हुए, हमें इस मुद्दे को तत्काल हल करना होगा, जैसा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विभिन्न प्रस्तावों और न्यायिक फैसलों में कहा गया है।’’ संपादकीय में आगे कहा गया कि क्षेत्रीय असंतुलन एक और ‘महत्वपूर्ण आयाम’ है, जो भविष्य में संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया को प्रभावित करेगा।

पत्रिका के अनुसार, ‘‘हमें यह सुनिश्चित करने के लिए नीतियों की जरूरत है कि जनसंख्या वृद्धि से किसी एक धार्मिक समुदाय या क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़े, जिससे सामाजिक-आर्थिक असमानता और राजनीतिक संघर्ष की स्थिति बन सकती है।’’ पत्रिका ने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय संगठनों, शोध संस्थानों और परामर्शदात्री एजेंसियों के माध्यम से आगे बढ़ाए जा रहे बाहरी एजेंडे से प्रभावित होने के बजाय, हमें देश में संसाधनों की उपलब्धता, भविष्य की आवश्यकताओं और जनसांख्यिकीय असंतुलन की समस्या को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक राष्ट्रीय जनसंख्या नीति बनाने का प्रयास करना चाहिए और उसे सभी पर समान रूप से लागू करना चाहिए।''

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