By एकता | Sep 04, 2026
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत गुरुवार को लंदन पहुंच गए। यह उनके तीन देशों के दौरे का आखिरी पड़ाव है। इससे पहले वह अमेरिका और कनाडा का दौरा कर चुके हैं। आरएसएस के शताब्दी वर्ष के मौके पर यह दौरा संगठन के वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है।
आरएसएस के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि भारत और दूसरे देशों के बीच रिश्ते केवल सरकारों के स्तर पर होने वाली कूटनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं होने चाहिए। लोगों के बीच संवाद के साथ-साथ सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आरएसएस संस्कृति और सभ्यता पर आधारित दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है और ऐसे में वैश्विक स्तर पर लोगों के बीच संवाद बढ़ाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। आंबेकर ने बताया कि मोहन भागवत का यह दौरा इंटीग्रल नामक संगठन के निमंत्रण पर हो रहा है।
लंदन में हिंदुत्व को लेकर पश्चिमी अकादमिक जगत में मौजूद धारणा पर सवाल पूछे जाने पर सुनील आंबेकर ने कहा कि इस विषय को लेकर कई गलतफहमियां हैं। उन्होंने कहा कि भारत को सिर्फ एक राजनीतिक राष्ट्र-राज्य की अवधारणा के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह एक सांस्कृतिक अवधारणा भी है। आंबेकर ने हिंदुत्व को किसी एक धर्म तक सीमित मानने से भी इनकार किया।
उनके मुताबिक, हिंदुत्व की अवधारणा सभी तरह की धार्मिक मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान और सत्य में विश्वास पर आधारित है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मोहन भागवत के इस दौरे से इन मुद्दों को समझने और गलतफहमियां दूर करने में मदद मिलेगी।
सुनील आंबेकर ने बताया कि इस सप्ताह मोहन भागवत सार्वजनिक जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों और अलग-अलग संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। उन्होंने बताया कि भागवत ने लंदन के विल्सडन स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर का दौरा भी किया है। आंबेकर के अनुसार, इन मुलाकातों का उद्देश्य भारत और ब्रिटेन के बीच संवाद, सहयोग और लंबे समय के संबंधों को मजबूत करना है।
आरएसएस के प्रचार प्रमुख ने दावा किया कि ब्रिटेन में 100 से ज्यादा संगठनों ने मोहन भागवत का स्वागत किया है और उनके कार्यक्रमों में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अलग-अलग समुदायों के नेताओं के साथ एक बड़ा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जिसे 310 संगठनों का समर्थन मिलने की बात कही गई है। आंबेकर ने कहा कि आरएसएस ब्रिटेन में अलग-अलग वर्गों और संगठनों के साथ संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
आरएसएस के 100 साल पूरे होने के अवसर पर मोहन भागवत का अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन का दौरा संगठन के वैश्विक संपर्क अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ संवाद के अलावा भारत की संस्कृति, सभ्यता और आरएसएस की विचारधारा से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत हो रही है।