आरएसएस अर्धसैनिक संगठन नहीं, भाजपा को देखकर निष्कर्ष निकालना बड़ी भूल: मोहन भागवत

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jan 03, 2026

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि वर्दी और शारीरिक अभ्यास के बावजूद संघ कोई अर्धसैनिक संगठन नहीं है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को देखकर आरएसएस के बारे में निष्कर्ष निकालने की कोशिश करना एक बड़ी भूल होगी। भागवत ने यहां प्रबुद्धजनों की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज को एकजुट करने और उसमें आवश्यक गुण व सद्गुण विकसित करने का कार्य करता है, ताकि भारत दोबारा किसी विदेशी शक्ति के अधीन न जाए।

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भागवत ने कहा कि संघ के खिलाफ एक ‘‘झूठा विमर्श’’ गढ़ा जा रहा है। उन्होंने कहा, “आजकल लोग सही जानकारी के लिए गहराई में नहीं जाते। वे स्रोत तक नहीं पहुंचते, बल्कि विकिपीडिया देख लेते हैं। वहां सब कुछ सही नहीं होता। जो भरोसेमंद स्रोतों तक जाएंगे, उन्हें संघ के बारे में सही जानकारी मिलेगी।’’ भागवत ने कहा कि इन्हीं भ्रांतियों के कारण संघ की भूमिका और उद्देश्य को स्पष्ट करना आवश्यक हो गया है। उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर के उनके दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि आम धारणा है कि संघ का जन्म किसी प्रतिक्रिया या विरोध के रूप में हुआ, जबकि ऐसा नहीं है।

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आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘‘संघ किसी प्रतिक्रिया या विरोध में नहीं बना है। संघ किसी से प्रतिस्पर्धा भी नहीं करता।’’ भागवत ने कहा कि अंग्रेज भारत पर आक्रमण करने वाले पहले लोग नहीं थे। उन्होंने कहा कि बार-बार दूर-दराज से आए कुछ गिने-चुने लोग, जो भारतीयों से हर दृष्टि से कमजोर थे, उन्होंने हमें पराजित किया। उन्होंने कहा, ‘‘वे न तो हम जैसे समृद्ध थे और न ही हम जैसे सदाचारी। देश की बारीकियों को जाने बिना भी वे हमारे घर में हमें हराते रहे। ऐसा सात बार हुआ और अंग्रेज आठवें आक्रांता थे। तब सवाल उठता है कि आजादी की गारंटी क्या है? हमें यह सोचने की जरूरत है कि ऐसा बार-बार क्यों हुआ।’’

भागवत ने कहा कि समाज को स्वयं को समझते हुए स्वार्थ से ऊपर उठना होगा। उनके अनुसार, यदि समाज गुणों और मूल्यों के साथ एकजुट होकर खड़ा होता है तो देश का भविष्य निश्चित रूप से बेहतर होगा। भागवत ने कहा कि संघ की वित्तीय स्थिति अब ठीक है और वह किसी बाहरी धन या चंदे पर निर्भर नहीं है। उन्होंने पिछले 100 वर्षों में संगठन द्वारा झेली गई आर्थिक कठिनाइयों को भी याद किया। अपने संबोधन के अंत में भागवत ने लोगों से संघ को बेहतर ढंग से समझने के लिए किसी ‘शाखा’ में आने की अपील की।

उन्होंने कहा, “मैंने संघ के बारे में अपने विचार रखे हैं। समझना है तो भीतर आकर समझिए। अगर मेरी बातों पर भी पूरा विश्वास न हो तो कोई बात नहीं। सबसे अच्छा तरीका है कि अंदर आकर संघ को समझा जाए। अगर मैं दो घंटे यह समझाऊं कि चीनी कितनी मीठी होती है, तो भी बात नहीं बनेगी। एक चम्मच चीनी चख लीजिए, खुद समझ में आ जाएगा।

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