लुलु मॉल में नामाज को लेकर बवाल, हिंदू संगठनों ने दी हनुमान चालीसा पढ़ने की चेतावनी

By अंकित सिंह | Jul 15, 2022

उद्घाटन के साथ ही लखनऊ का लुलु मॉल सुर्खियों में आ गया है। इस मॉल को उत्तर भारत का सबसे बड़ा मॉल माना जा रहा था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मॉल का उद्घाटन किया था। लेकिन अब इस मॉल में कुछ ऐसा हुआ है जिसकी वजह से बवाल मच गया है। दरअसल, लुलु मॉल अपने परिसर के अंदर कथित रूप से नमाज पढ़ने देने और सिर्फ मुसलमानों को ही नौकरी देने को लेकर विवाद में आ गया है। यह विवाद टोपी पहने कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से लुलु मॉल के अंदर नमाज पढ़ने का वीडियो वायरल होने के बाद पैदा हुआ। इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। मामला गर्म हुआ तो मॉल प्रबंधन की ओर से इस को लेकर शिकायत की गई है। इस शिकायत के बाद पुलिस ने नमाज पढ़ने के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। मॉल प्रबंधन का दावा है कि नमाज पढ़ने वाले लोग अज्ञात थे। उनका कोई भी स्टाफ नमाजियों में शामिल नहीं था। पुलिस ने भी अज्ञात युवकों पर इस मामले में एफआईआर दर्ज कर लिया है। 

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इस बीच, लुलु मॉल के महाप्रबंधक समीर वर्मा ने एक वीडियो जारी कर कहा लुलु मॉल सभी धर्मों का आदर करता है। मॉल के अंदर किसी भी तरह का धार्मिक कार्य या इबादत की इजाजत नहीं है। हम अपने स्टाफ तथा सुरक्षा कर्मियों को ऐसी गतिविधियों पर नजर रखने का प्रशिक्षण देते हैं। धरना प्रदर्शन के दौरान सुशांत गोल्फ सिटी थाने के कुछ पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लुलु मॉल के बाहर पहुंचे। उसके बाद शिशिर चतुर्वेदी और संगठन के अन्य लोगों ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया मॉल के अंदर नमाज पढ़ी गई जो कि सार्वजनिक स्थलों पर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं होने संबंधी नीति के खिलाफ है। सोशल मीडिया पर प्रसारित खबरों के मुताबिक लुलु मॉल में पुरुष कर्मचारियों में 70% मुस्लिम हैं और 30% महिला कर्मचारी हिंदू समुदाय से है। ऐसा करके लुलु मॉल प्रबंधन लव जिहाद को बढ़ावा दे रहा है। महासभा के सदस्यों ने पुलिस से शुक्रवार को लुलु मॉल के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने की अनुमति भी मांगी है। इस बीच, पुलिस उपायुक्त (दक्षिणी) गोपाल कृष्ण चौधरी ने बताया कि महासभा सदस्यों द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत पर गौर किया जा रहा है। जहां तक अनुमति का सवाल है, तो इसके लिए निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार संबंधित विभागों से विचार-विमर्श कर निर्णय लिया जाएगा।

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