By अभिनय आकाश | Oct 28, 2026
भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) ने दलाल स्ट्रीट पर कदम रखते ही ऐसा तूफान खड़ा किया कि फंड जुटाने से लेकर निवेशकों की भागीदारी तक के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए। महज 100 मिनट के भीतर पूरी तरह सब्सक्राइब होकर और 1.38 करोड़ से ज्यादा बोलियां बटोरकर कंपनी का ₹30,188 करोड़ का यह मेगा इश्यू हुंडई मोटर इंडिया (₹27,870 करोड़) को पछाड़ देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन गया है। संस्थागत और खुदरा निवेशकों के इस ऐतिहासिक भरोसे ने इस लिस्टिंग को भारतीय कैपिटल मार्केट का सबसे यादगार पड़ाव बना दिया है।
देश के सबसे बड़े इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) - जियो प्लेटफॉर्म्स IPO - की सबसे खास बातों में से एक, इसमें आए आवेदनों की संख्या रही। जियो प्लेटफॉर्म्स को 1.38 करोड़ से ज़्यादा आवेदन मिले, जो भारतीय IPO के पिछले 97.33 लाख आवेदनों के रिकॉर्ड से कहीं ज़्यादा हैं। इस शानदार प्रतिक्रिया से कंपनी में निवेशकों की गहरी दिलचस्पी का पता चलता है। इसमें रिटेल निवेशकों, हाई-नेट-वर्थ व्यक्तियों, संस्थागत निवेशकों और रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों - सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
2. खुदरा भागीदारी ने एक नया मानक स्थापित किया
खुदरा निवेशकों की ओर से 1.05 करोड़ से अधिक आवेदन आए। खुदरा हिस्से के लिए 2.72 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, जो यह दर्शाता है कि व्यक्तिगत निवेशकों के लिए आरक्षित शेयरों की तुलना में मांग कहीं अधिक थी। जियो जैसी बड़ी पेशकश के मामले में भागीदारी का यह स्तर विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
3. पब्लिक इश्यू में लगभग 5 लाख करोड़ रुपये की बोलियां आईं
इस पेशकश के पब्लिक हिस्से में करीब 4.9 लाख करोड़ रुपये की बोलियां आईं। मांग का स्तर सब्सक्रिप्शन के लिए उपलब्ध शेयरों के मूल्य से कहीं अधिक था, जिससे यह इश्यू भारतीय प्राइमरी मार्केट की गहराई और क्षमता के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया।
4. संस्थागत निवेशकों ने बड़ा दांव लगाया
क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) ने लगभग 3.87 लाख करोड़ रुपये के शेयरों के लिए बोली लगाई, और उनके लिए आरक्षित हिस्सा 70.55 गुना सब्सक्राइब हुआ। इस प्रतिक्रिया से पता चलता है कि जियो प्लेटफॉर्म्स में संस्थागत निवेशकों की कितनी गहरी दिलचस्पी है, और भारत के दूरसंचार तथा डिजिटल सेवा बाजारों में इसकी क्या स्थिति है।
5. पब्लिक इश्यू से पहले एंकर बुक में काफी दिलचस्पी दिखी
जियो प्लेटफॉर्म्स की एंकर बुक में लगभग 8,110 करोड़ रुपये के आवंटन के मुकाबले करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की बोलियां आईं। यह मांग पब्लिक सब्सक्रिप्शन अवधि शुरू होने से पहले ही आ गई थी, जो बड़े निवेशकों (जिनमें ग्लोबल एसेट मैनेजर और घरेलू वित्तीय संस्थान शामिल हैं) की गहरी दिलचस्पी को दर्शाती है।
6. रिलायंस इंडस्ट्रीज के मौजूदा शेयरधारकों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया
शेयरधारक आरक्षण श्रेणी (शेयरहोल्डर रिज़र्वेशन कैटेगरी) में 21 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों को IPO में भाग लेने के लिए एक अलग रास्ता दिया गया था, जिससे इस पब्लिक इश्यू को जियो की मूल कंपनी (पैरेंट कंपनी) के निवेशक आधार से जोड़ा जा सका।
7. शेयरधारकों की बोलियां आरक्षित राशि से काफी अधिक रहीं
शेयरधारक आरक्षण श्रेणी के तहत लगभग 19,000 करोड़ रुपये की बोलियां लगाई गईं, जबकि इसके लिए 2,500 करोड़ रुपये तक का आरक्षण रखा गया था। इस प्रतिक्रिया से पता चलता है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों में जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में एंट्री (लिस्टिंग) में हिस्सा लेने को लेकर काफी दिलचस्पी है।
8. हाई-नेट-वर्थ निवेशकों ने मांग बढ़ाई
'स्मॉल हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल' (sHNI) श्रेणी से आए आवेदनों की संख्या 5.75 लाख को पार कर गई, जबकि 'लार्ज HNI' श्रेणी से आए आवेदन 3.5 लाख से अधिक रहे। इन श्रेणियों में क्रमशः 2 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक और 10 लाख रुपये से अधिक के गैर-संस्थागत (non-institutional) आवेदन शामिल हैं। इनकी भागीदारी से पता चलता है कि मांग केवल खुदरा निवेशकों और बड़े संस्थानों तक ही सीमित नहीं थी।
9. IPO को बहुत जल्दी पूरा सब्सक्रिप्शन मिल गया
21 अक्टूबर को खुलने के 100 मिनट के भीतर ही जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। 'क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स' (QIB) का हिस्सा तो पहले 10 मिनट में ही सब्सक्राइब हो गया, जो बड़े निवेशकों की ओर से शुरुआती मजबूत मांग को दर्शाता है। पहले दिन के अंत तक, पूरा इश्यू 3.16 गुना सब्सक्राइब हो चुका था।
10. इश्यू साइज के मामले में जियो ने हुंडई मोटर इंडिया को पीछे छोड़ा
30,188 करोड़ रुपये के इश्यू साइज के साथ, जियो प्लेटफॉर्म्स ने हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के IPO को पीछे छोड़ दिया है और यह भारत का सबसे बड़ा पब्लिक ऑफरिंग बन गया है। यह उपलब्धि भारत के इक्विटी फंड जुटाने वाले बाजार के बढ़ते दायरे और बड़ी कंपनियों की निवेशकों से भारी पूंजी जुटाने की क्षमता को दर्शाती है।
11. इस पेशकश में केवल नए शेयर शामिल थे, इसमें 'ऑफर फॉर सेल' (मौजूदा शेयरधारकों द्वारा शेयरों की बिक्री) शामिल नहीं था
आम IPO के विपरीत, जिनमें नए शेयर जारी करने के साथ-साथ मौजूदा शेयरधारकों द्वारा शेयरों की बिक्री ('ऑफर फॉर सेल') भी शामिल होती है, जियो प्लेटफॉर्म्स की इस पेशकश में केवल नए इक्विटी शेयर शामिल थे। इसमें लगभग 27 करोड़ नए शेयर जारी किए गए। इससे प्राप्त राशि का मुख्य उद्देश्य रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज को चुकाना या समय से पहले वापस करना है, जबकि बची हुई राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट कार्यों के लिए किया जाएगा।
12. इसका अनुमानित मूल्यांकन 100 अरब डॉलर से अधिक था
जियो प्लेटफॉर्म्स ने IPO कीमत पर 100 अरब डॉलर से अधिक के अनुमानित इक्विटी मूल्यांकन के साथ पब्लिक मार्केट में प्रवेश किया। यह मूल्यांकन इसके दूरसंचार और डिजिटल सेवा व्यवसायों के बड़े पैमाने को दर्शाता है, साथ ही भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था को लेकर निवेशकों की उम्मीदों को भी दिखाता है। लिस्टिंग के समय, BSE पर जियो प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 12.51 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह यह भारती एयरटेल से आगे निकल गया और केवल अपनी मूल कंपनी, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के पीछे रहा। लगभग 15.90 लाख करोड़ रुपये के मार्केट मूल्यांकन के साथ, RIL भारत की लिस्टेड कंपनियों में शीर्ष स्थान पर बनी रही।
13. शेयरों की शुरुआत 21.4% के भारी प्रीमियम के साथ हुई
28 अक्टूबर को जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर BSE और NSE दोनों पर 1,358 रुपये के भाव पर लिस्ट हुए, जबकि इनका इश्यू प्राइस 1,119 रुपये था। यह 21.36% का लिस्टिंग प्रीमियम था। इस लिस्टिंग प्राइस के आधार पर, कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 12.5 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिससे यह भारत की सबसे मूल्यवान लिस्टेड कंपनियों में से एक बन गई।