Russia और China ने America के खिलाफ बनाया नया प्लान! Putin और Jinping की जोड़ी ने पलट दिया दुनिया का पावर गेम

By नीरज कुमार दुबे | May 20, 2026

बीजिंग में आयोजित शिखर बैठक के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक बार फिर अमेरिका केंद्रित वैश्विक व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत करते हुए कहा कि कुछ देश पूरी दुनिया पर अपना प्रभुत्व थोपने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ऐसी नीतियां अब असफल हो चुकी हैं। रूस और चीन ने बिना नाम लिए अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि दुनिया को औपनिवेशिक सोच और एकतरफा दबाव की राजनीति से खतरा पैदा हो रहा है।

इसे भी पढ़ें: Putin संग Xi Jinping की West Asia पर हुंकार, कहा- अब बस, तत्काल रोकें लड़ाई

शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में कहा कि रूस और चीन को हर प्रकार की एकतरफा दबंगई और इतिहास को पीछे ले जाने वाली गतिविधियों का विरोध करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश रणनीतिक स्तर पर और अधिक समन्वय बनाए रखेंगे तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को तेज करेंगे। दूसरी ओर पुतिन ने कहा कि रूस और चीन अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थिरता लाने वाली ताकतें हैं और दोनों स्वतंत्र विदेश नीति के लिए प्रतिबद्ध हैं।

बैठक के दौरान रूस और चीन ने लंबे समय से अटकी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना को आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई। साइबेरिया शक्ति दो नामक इस परियोजना को लेकर रूस के सरकारी प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि दोनों देशों के बीच सामान्य समझ बन चुकी है, हालांकि कीमत और समयसीमा जैसे विषयों पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। यह परियोजना रूस के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों ने रूस के यूरोपीय ऊर्जा बाजार को काफी कमजोर कर दिया है। ऐसे में चीन अब रूस के लिए सबसे बड़ा और सबसे भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार बनकर उभरा है।

पुतिन ने कहा कि रूस चीन को ऊर्जा आपूर्ति जारी रखने के लिए तैयार है और दोनों देशों के आर्थिक संबंध अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच चुके हैं। उन्होंने बताया कि रूस और चीन के बीच अधिकांश व्यापारिक लेनदेन अब रूबल और युआन में हो रहा है। इसे भी अमेरिका के प्रभाव वाले वैश्विक वित्तीय ढांचे को चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और नई तकनीकों में भी व्यापक सहयोग की बात कही।

हम आपको यह भी बता दें कि विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और चीन की यह नजदीकी केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका और पश्चिमी देशों के बढ़ते दबाव के खिलाफ साझा रणनीतिक गठबंधन का संकेत भी है। चीन जहां रूस के साथ खड़ा दिखना चाहता है, वहीं वह पश्चिम से पूरी तरह टकराव की स्थिति से भी बचना चाहता है। इसके बावजूद बीजिंग में हुए इस शिखर सम्मेलन ने साफ कर दिया कि दोनों देश अब वैश्विक राजनीति में अमेरिका के प्रभाव को चुनौती देने के लिए अधिक संगठित तरीके से आगे बढ़ रहे हैं।

बैठक के दौरान दोनों नेताओं का भव्य स्वागत किया गया। सम्मान गारद और तोपों की सलामी के बीच दोनों नेताओं ने हाथ मिलाकर दुनिया को अपने मजबूत रिश्तों का संदेश दिया। हालांकि किसी भी नेता ने मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया, लेकिन संयुक्त बयान और समझौतों ने यह स्पष्ट कर दिया कि रूस और चीन आने वाले समय में वैश्विक राजनीति में साझा मोर्चे के रूप में अपनी भूमिका और मजबूत करना चाहते हैं।

प्रमुख खबरें

Political Drama के बाद फिर BSP में वापस कैसे लौटे Akash Anand? क्या है Mayawati का 2027 वाला प्लान?

Google Cloud India के अंतरिम प्रमुख बने अमित कुमार, शशिकुमार श्रीधरन ने छोड़ा पद

Dandiya Night Outfits: Garba Nights में ट्रेडिशनल लुक के लिए Bandhani Lehenga और Indo Western करें ट्राई

J&K में UCC लागू करने से इंकार करते हुए Omar Abdullah ने मोदी सरकार को दे डाली बड़ी चुनौती