By अभिनय आकाश | Apr 20, 2026
कहते हैं ताकतवर वही है जिससे दुश्मन दूर से ही सावधान रहे और आज भारत ने ऐसा ही एक कदम उठाया है जिसने दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है। भारत और रूस एक दूसरे की जमीन पर अपने हजारों सैनिक फाइटर जेट और वॉरशिप तैनात करने की तैयारी शुरू कर रहे हैं। क्या यह किसी बड़े युद्ध की तैयारी है या फिर एक ऐसा कदम जिसने दुनिया के कई देशों की नींद उड़ा दी है। दरअसल बता दें कि भारत और रूस के बीच रीलॉस यानी कि रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक सपोर्ट समझौता पूरी तरह से लागू हो चुका है। इसके तहत दोनों देश एक दूसरे के एयरबेस, नेवल बेस और सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल कर सकते हैं और वह भी पूरी ऑपरेशनल क्लेरिटी के साथ। इस डील की सबसे बड़ी ताकत इसकी क्षमता है। अब दोनों देश एक साथ 3000 सैनिक, 10 मिलिट्री एयरक्राफ्ट और पांच वॉरशिप्स एक दूसरे के क्षेत्र में तैनात कर सकते हैं। लेकिन असली खेल सिर्फ तैनाती नहीं है बल्कि उस तैनाती को मिलने वाला पूरा सपोर्ट है। यानी कि रिफ्यूलिंग, रिपेयर, मेंटेनेंस, मेडिकल और ट्रांसपोर्ट यानी पूरी युद्ध मशीन को कहीं भी चलाने की ताकत।
रूस के पास आर्कटिक से लेकर यूरोप तक फैले सैन्य बेस है और इस डील के बाद भारत को इन इलाकों में एक्सेस मिल सकता है। खासकर आर्कटिक जहां भविष्य के नए समुद्री रास्ते बन रहे हैं। यानी आने वाले समय में व्यापार और संसाधनों पर सीधा असर होगा। दूसरा लॉजिस्टिक मतलब रियल पावर। युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं बल्कि सप्लाई से भी जीता जाता है। अब भारत और रूस एक दूसरे को फ्यूल, रिपेयर बेस सपोर्ट दे सकेंगे। मतलब जहां जरूरत वहां ऑपरेशन आसान। तीसरा स्ट्रेटेजिक ऑटोनोमी जिसका पहले हमने जिक्र किया। यानी कि भारत ने अमेरिका के साथ एलई एमओए किया और अब रूस के साथ रिलोस। मतलब साफ है भारत किसी एक गुट में नहीं बल्कि हर बड़ी ताकत के साथ संतुलन बनाकर चल रहा है। अब आप यह समझिए कि दुश्मन देश इससे क्यों चिंतित है। सबसे बड़ा कारण भारत की बढ़ती पहुंच। भारत अब सिर्फ अपने इलाकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि यूरोप, आर्कटिक और एशिया में भी एक्टिव हो सकता है।