Russia ने ईरान को थमा दिया ब्रह्मास्त्र, पुतिन के चक्रव्यूह में कैसे फंस गए ट्रंप?

By अभिनय आकाश | May 09, 2026

समंदर में अमेरिका और ईरान के बीच बीती रात जो टकराव हुआ उसने पूरी दुनिया को फिर से तीसरे विश्व युद्ध जैसे डर की तरफ धकेल दिया है। लेकिन अब इस जंग में सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक मोड़ रूस की एंट्री मानी जा रही है।  खबर है कि व्लादमीर पुतिन ने ईरान के लिए अपना ऐसा रूसी चक्रव्यूह खोल दिया जिसे तोड़ना अमेरिका जैसी महाशक्ति के लिए भी आसान नहीं होगा। द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट ने पूरी दुनिया में हलचल पैदा कर दी है। दावा किया गया है कि रूस की खुफिया एजेंसी जीआरयू ने ईरान के लिए एक सीक्रेट मास्टर प्लान तैयार किया है। इस प्लान के तहत तेहरान को 5000 ऐसे फाइबर ऑप्टिक ड्रोन दिए जा रहे हैं जिन्हें दुनिया का कोई इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम ट्रैक नहीं कर पाएगा। यानी अब जंग सिर्फ मिसाइलों और जहाजों की नहीं रही बल्कि टेक्नोलॉजी की ऐसी लड़ाई बन चुकी है जहां दुश्मन को हमला दिखेगा भी नहीं। सबसे खतरनाक बात यह बताई जा रही है कि यह ड्रोन किसी रेडियो सिग्नल पर नहीं चलते। इन्हें एक बेहद पतली फाइबर ऑप्टिक केबल के जरिए कंट्रोल किया जाता है। इसका सीधा मतलब है कि अमेरिका के सबसे महंगे जैमर्स भी इन्हें रोक नहीं पाएंगे। यानी नो सिग्नल, नो जैमी। इन ड्रोंस में ऑपरेटर को बेहद क्लियर लाइव वीडियो मिलता है जिससे 40 किमी दूर बैठे दुश्मन पर भी सटीक हमला किया जा सकता है। 

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लेबनान में हिज्ला पहले ही ऐसे रूसी डन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके इसरली सेना को चुनौती देता दिखाई दे चुका है। और अब अगर यही सिस्टम ईरान के हाथों में बड़े स्तर पर पहुंचता है तो मिडिल ईस्ट की जंग और ज्यादा खतरनाक मोड़ ले सकती है। अब दुनिया की नजर सिर्फ एक सवाल पर टिकी है। क्या ट्रंप रूसी चक्रव्यूह को तोड़ पाएंगे या फिर ईरान की ये नई किलर मशीनें अमेरिका के लिए ऐसा डरावना सपना बन जाएंगी जिससे बाहर निकलना बेहद मुश्किल होगा। कल तक अमेरिका को ना कर रहे सऊदी अरब ने आखिरकार हां कर दी है। जी हां, ईरान, अमेरिका, इसराइल टेंशन के बीच मीडिया रिपोर्ट के हवाले से बड़ी खबर आ रही है। जिसमें कहा जा रहा है कि सऊदी अरब ने अमेरिकी फर्सेस को अपने यहां मौजूद एयरबेस और अपना एयर स्पेस इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जनरल की ये रिपोर्ट छपी है। यह खबर इसलिए भी अहम है कि इससे पहले सऊदी ने हॉर्मोस छुड़वाने के लिए ईरान के खिलाफ किसी भी कारवाई के लिए अपने एयरबेस देने से मना कर दिया था। जिसके चलते अमेरिका को अपना प्रोजेक्ट फ्रीडम ऑपरेशन ही रोकना पड़ गया था।  

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बड़ा सवाल यह है कि कल तक अमेरिका को साफ मना कर चुका सऊदी अचानक कुछ ही घंटों में ईरान के खिलाफ कैसे हो गया? इस पर एक्सपर्ट कहते हैं कि दरअसल अमेरिकी और पश्चिमी मीडिया में इस तरह की खबरें जानबूझकर भी प्लांट करवाई जाती हैं। मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट तो यह भी कयास लगाते हैं कि यूएई जो कि सीधे तौर पर अमेरिका और इसराइल के खेमे में है, अपने दो दुश्मनों को निपटाना चाह रहा है। एक है ईरान और दूसरा है सऊदी। यूएई भी अपने दोस्तों के साथ मिलकर इस तरह की खबरें चलवाता है जिससे सऊदी और ईरान के बीच इख्तलाफ पैदा हो और ईरान गुस्से में सऊदी पर एक आध बड़ा हमला कर दे जिससे माहौल बन जाए। 

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