Russia ने बेचा 22000 किलोग्राम का बंपर सोना, क्या करेगा भारत

By अभिनय आकाश | Apr 25, 2026

दुनिया की सबसे बड़ी जियोपॉलिटिकल टेंशन रूस, यूक्रेन वॉर अब अपने पांचवें साल में पहुंचने वाली है और इसका असर सिर्फ युद्ध भूमि तक सीमित नहीं है। इसका असर सीधा अब रूस की अर्थव्यवस्था और खासकर उसके खजाने पर साफ दिखने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सेंट्रल बैंक ऑफ रशिया ने साल 2026 की शुरुआत में अब तक करीब 22,000 किलोग्राम यानी कि 21.8 टन सोना बाजार में बेच दिया है। इसकी कीमत करीब ₹33,440 करोड़ बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है आखिर पुतिन को इतना बड़ा कदम क्यों उठाना पड़ा? बता दें रूस का बजट घाटा मार्च 2026 तक 61.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। इसका मतलब है कि सरकार जितना कमा रही है उससे कहीं ज्यादा खर्च कर रही है और खर्चा कहां हो रहा है? सबसे बड़ा हिस्सा जा रहा है युद्ध पर हथियार पर। सैनिक, लॉजिस्टिक और टेक्नोलॉजी पर। युद्ध जितना लंबा खिसता जा रहा है उतना ही महंगा होता जा रहा है। इसके अलावा पश्चिम देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने रूस की अर्थव्यवस्था को झटका दिया है। हालांकि भारत ने उसे संभालने की कोशिश की है। इंटरनेशनल ट्रेड सीमित हो गया है। विदेशी निवेश कम हो गया है और रूसी करेंसी रूबल पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे में सरकार के पास दो ही बड़े रास्ते बचते हैं। या तो कर्ज ले या फिर अपने रिजर्व का इस्तेमाल करें और रूस ने चुना है दूसरा रास्ता सोना बेचना। अब किटको की रिपोर्ट के अनुसार 1 अप्रैल 2026 तक रूस का कुल गोल्ड रिजर्व घटकर 2304.76 टन रह गया है। सिर्फ मार्च महीने में ही इसमें 6.22 टन की गिरावट आई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि रूस दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड होल्डर्स में से एक रहा है।

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क्योंकि जब देश की करेंसी कमजोर होती है तो लोग अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए सोना खरीदते हैं। रूबल की वैल्यू गिर रही है इसलिए लोग कैश की बजाय गोल्ड में निवेश कर रहे हैं। युद्ध और अनिश्चितता के समय में सोना हमेशा सेफ हेवन माना जाता है। यानी सरकार बेच रही है मजबूरी में और जनता खरीद रही है डर के कारण। अब भारत के लिए इसका क्या मतलब है? देखिए भारत के लिए इसका बहुत बड़ा मतलब है? देखिए इसको हम कई पॉइंट्स में बताएंगे। पहला गोल्ड प्राइस पर असर। भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ताओं में से एक है। अगर रूस जैसे बड़े देश मार्केट में सोना बेचते हैं तो ग्लोबल सप्लाई बढ़ती है जिससे कीमतों पर दबाव आ सकता है। दूसरी तरफ अगर दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है तो गोल्ड की डिमांड बढ़ती है जो कीमतों को ऊपर ले जाती है। यानी भारत में सोने की कीमतें आने वाले समय में वलाटाइल रह सकती हैं। इसके अलावा रुपया और ट्रेड देखिए रूस और भारत के बीच ट्रेड में पिछले कुछ सालों में तेजी आई है। खासकर तेल और डिफेंस सेक्टर में अगर रूस की अर्थव्यवस्था कमजोर होती है तो इसका असर भारत रूस व्यापार पर पड़ सकता है। साथ ही रुपए रूबल ट्रेंडिंग मैकेनिज्म पर भी दबाव आ सकता है। इसके अलावा ऊर्जा कीमतों की बात करें तो रूस अमेरिका के सबसे बड़े तेल और गैस सप्लायर्स में से एक है। अगर उसकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती है तो वह ज्यादा रेवेन्यू के लिए ऊर्जा निर्यात बढ़ा सकता है या कीमतों में बदलाव कर सकता है। यानी इसका सीधा असर भारत के पेट्रोल डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि भारत हमेशा एक बैलेंसिंग एक्ट करता आया है। 

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