By अनन्या मिश्रा | Jan 09, 2026
आज यानी की 09 जनवरी को केंद्रीय मंत्री डॉ. एस जयशंकर अपना 71वां जन्मदिन मना रहे हैं। बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हमेशा अपने बयानों से विरोधियों को करारा जवाब दिया। फिर चाहे चीन को एलओसी पर जवाब देने की बात हो या आतंकवाद हो। एस जयशंकर हमेशा अपने तर्कों से विरोधियों को पटखनी देने नजर आए हैं। वह पीएम मोदी के पसंदीदा डिप्लोमेट्स रहे हैं। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर एस जयशंकर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
नई दिल्ली में 09 जनवरी 1955 को एस जयशंकर का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम के सुब्रमण्यम था, जोकि भारत के जाने-माने राणनीतिक विशेषज्ञ और सिविल सेवक थे। एस जयशंकर ने सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। फिर बाद में जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी की। एस जयशंकर की शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनको कूटनीति और राजनीति की गहरी समझ दी।
साल 1977 में एस जयशंकर भारतीय विदेश सेवा में शामिल हुए और उनका राजनयिक करियर करीब चार दशकों तक फैला रहा। वह चीन, अमेरिका, सिंगापुर और चेक गणराज्य जैसे अहम देशों में भारत के राजदूत रहे। खासतौर पर एस जयशंकर की तैनाती चीन और अमेरिका जैसे संवेदनशील देशों में हुई, जोकि भारत की विदेश नीति के लिए बेहद अहम माना जाता है। फिर साल 2015 में वह भारत के विदेश सचिव बने और साल 2018 तक वह इसी पद पर रहे। इस दौरान चीन नीति, भारत-अमेरिका संबंधों और पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को नई दिशा मिली।
साल 2019 में एस जयशंकर ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इसी साल उनको मोदी सरकार में विदेश मंत्री बनाया गया। वहीं राज्यसभा सांसद के दौरान उन्होंने संसद और वैश्विक मंच दोनों जगह जयशंकर ने भारत का पक्ष मुखरता से रखा। जयशंकर की पहचान विदेश मंत्री के रूप में स्पष्ट, सीधे और तथ्यों पर आधारित कूटनीति की रही है। फिर चाहे यूक्रेन संकट हो, पश्चिमी देशों के साथ रिश्ते और चीन के साथ सीमा विवाद हो, हर रिश्ते पर एस जयशंकर ने भारत के राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी।
एस जयशंकर को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जोकि बिना झिझक के भारत का पक्ष रखते हैं। एस जयशंकर के बयानों में आत्मविश्वास के अलावा रणनीतिक संतुलन भी दिखता है। डिप्लोमेट से नेता तक का जयशंकर का सफर दिखाता है कि शिक्षा, अनुभव और स्पष्ट सोच कैसे किसी देश की विदेश नीति को दिशा दे सकती है।