कितने दिनों से नहीं सुना 'सबका साथ-सबका विकास' का नारा, क्या 'एक हैं तो सेफ हैं' ने ले ली जगह

By अंकित सिंह | Nov 23, 2024

प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने जब 2014 में शपथ ली थी, उसके बाद उन्होंने एक नारा दिया था- सबका साथ, सबका विकास। जब 2019 में वह दोबारा जीत के आए तब उन्होंने नारा दिया- सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास। हालांकि, ऐसा लगता है कि यह नारा कहीं गुम सा हो गया है। हाल में जितने विधानसभा चुनाव हुए, उनमें प्रचार करने के दौरान भाजपा के किसी बड़े नेता ने सबका साथ, सबका विश्वास के नारे पर जोर नहीं दिया। बल्कि एक है तो सेफ है और बटेंगे तो कटेंगे की बात डंके की चोट पर की गई। 

हरियाणा से यह दोनों तारों के इस्तेमाल की शुरुआत हुई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले यह नारा दिया था। इसके बाद तमाम बड़े नेताओं ने इसे अपनी रैलियों कही। महाराष्ट्र में यह नारा काम करता हुआ दिखाई दे रहा है। वहीं हरियाणा में भी बंटोगे तो कटोगे का नारा सुपरहिट साबित हुआ था। महाराष्ट्र में शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति ने महा विकास आघाडी (एमवीए) गठबंधन के खिलाफ अजेय बढ़ हासिल कर ली, जबकि झारखंड में ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेमोक्रेटिक इंक्लूसिव अलायंस) सत्ता में वापसी करता दिख रहा है। 

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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए मतों की गिनती के साथ ही भाजपा में जश्न का माहौल है जहां 149 सीट पर चुनाव लड़ने वाली पार्टी 125 सीट जीतने की ओर अग्रसर है। शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के साथ मिलकर भाजपा नीत सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन राज्य की 288 सीट में से 219 सीट जीतने की ओर अग्रसर है, जबकि कांग्रेस-शिवसेना (उबाठा), राकांपा (एसपी) गठबंधन को सिर्फ 51 सीट पर ही जीत मिलने की संभावना है। इस राज्य में निर्णायक जनादेश से सकते में आए विपक्ष को झारखंड ने राहत दी।

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