By एकता | Sep 06, 2026
कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद गिराए जाने के करीब 24 घंटे बाद रविवार को मलबा हटाने के दौरान एक कुआं मिला है। मलबा साफ कर रही टीम को यह कुआं मस्जिद के नीचे मिला। बताया जा रहा है कि कुएं की गहराई करीब 15 फीट और चौड़ाई करीब डेढ़ मीटर है। कुएं के ऊपर एक भारी स्लैब डाला गया था। जब पोकलेन मशीन से स्लैब नहीं टूटा तो टीम ने कटर की मदद से उसे हटाया। स्लैब हटाते ही नीचे कुआं दिखाई दिया। फिलहाल यह साफ नहीं है कि कुआं कब बनाया गया था और यह कितना पुराना है।
मस्जिद पक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले के खिलाफ जिला जज की अदालत में अपील की थी। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद जिला जज ने 2 सितंबर को सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी थी।
इस मामले की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत से हुई थी। उन्होंने जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायत भेजकर आरोप लगाया था कि कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर कब्जा करके मस्जिद बनाई गई है। शिकायत की जांच के बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट में मामला दर्ज किया गया। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अध्यासियों की बेदखली) अधिनियम, 1972 के तहत की गई थी।
सुनवाई के बाद 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा था कि प्रदेश सरकार की 315 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा करके मस्जिद का निर्माण किया गया है। अदालत ने संबंधित पुराने राजस्व रिकॉर्ड का भी हवाला दिया। रिकॉर्ड में फसली वर्ष 1324 और 1359 में इस जमीन को कचहरी-कलेक्ट्रेट के रूप में दर्ज पाया गया था। इसके बाद मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए जमीन खाली कराने और कब्जाधारी से करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति वसूलने का आदेश दिया गया था।
मस्जिद पक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ 20 जुलाई को जिला जज कोर्ट में अपील की थी। करीब डेढ़ महीने तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला जज ने 2 सितंबर को अपील खारिज कर दी और सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी। पुलिस प्रशासन ने शुक्रवार रात ही कलेक्ट्रेट परिसर की घेराबंदी कर दी थी और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
मस्जिद के मलबे के नीचे मिला कुआं इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कुआं कितना पुराना है, इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से होता था और इसे कब बनाया गया था। आगे की जांच के बाद ही इसकी स्थिति और इतिहास के बारे में अधिक जानकारी सामने आ सकेगी।