By अनन्या मिश्रा | Jun 29, 2026
हर साल ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि को कबीरदास की जयंती मनाई जाती है। वह एक ऐसे संत रहे, जिनके अनुयायी सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि मुस्लिम भी रहे हैं। कबीरदास जी ने धर्म के नाम पर समाज में फैली बुराइयों और अंधविश्वास के प्रति लोगों को जागरुक किया। हर साल कबीरदास जी की जयंती बेहद धूमधाम के साथ मनाई जाती है। इस बार 29 जून 2026 को कबीरदास जयंती मनाई जा रही है।
उनका जीवन कई किंवदंतियों से घिरा हुआ है। कबीरदास जी का पालन-पोषण एक जुलाहा दंपति ने किया था। वह औपराचिक रूप से शिक्षित नहीं थे। लेकिन कबीरदास जी की वाणी में जो सच्चाई और गहराई थी, वह किसी विद्वान से कम नहीं थी।
बता दें कि कबीरदास जी निर्मुण ब्रह्म के उपासक थे और वह एक ही ईश्वर को मानते थे। वह धर्म, अंधविश्वास और पूजा के नाम पर होने वाले आडंबरों के खिलाफ थे। उन्होंने अपने दोहों में जीवन को सुखी और सफल बनाने के सूत्र बताए हैं।
एक अंधविश्वास था कि जिसकी मृत्यु काशी में होगी वह स्वर्ग जाएगा और जिसकी मृत्यु मगहर में होगी वह नर्क में जाएगा। इस अंधविश्वास को तोड़ने के लिए कबीरदास जी ने अपना जीवन काशी में गुजारा और उन्होंने महगर में अपने प्राण त्यागे थे।