एक ही युद्ध, अलग-अलग नतीजे! ईरान, लेबनान और हिज़्बुल्लाह से निपटने के तरीके पर अमेरिका और इज़राइल में बढ़े मतभेद

By रेनू तिवारी | Jun 09, 2026

मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण संघर्ष के बीच दुनिया के दो सबसे करीबी सहयोगियों—अमेरिका और इज़राइल—के बीच रणनीतिक दरारें अब खुलकर सामने आने लगी हैं। लेबनान और ईरान में हाल ही में हुए हमलों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच प्राथमिकताओं के गंभीर मतभेदों को उजागर कर दिया है। शुरुआत में भले ही दोनों नेताओं का नज़रिया एक जैसा लग रहा था, लेकिन अब युद्ध को खत्म करने और दुश्मनों से निपटने के तरीकों को लेकर दोनों के रास्ते अलग होते दिख रहे हैं।

ट्रंप ने हिज़्बुल्लाह के साथ युद्ध से जुड़े अभियानों के दौरान बेरूत पर हमले बढ़ाने के खिलाफ़ इज़राइल को चेतावनी दी थी। इसके बावजूद, इज़राइल ने हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने हालिया युद्धविराम के बाद पहली बार इज़राइल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इज़राइल ने भी ईरान पर जवाबी हमला किया, जबकि वाशिंगटन तेहरान के साथ नाजुक बातचीत जारी रखे हुए था।


लेबनान में हमलों को लेकर बढ़ता तनाव

युद्धविराम की घोषणाओं के बावजूद, इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच लेबनान में फिर से लड़ाई शुरू होने के बाद स्थिति बिगड़ गई। ईरान का कहना है कि किसी भी बड़े क्षेत्रीय समझौते में लेबनान में हमलों को पूरी तरह रोकना शामिल होना चाहिए, जबकि इज़राइल का तर्क है कि हिज़्बुल्लाह से खतरा पूरी तरह खत्म होने तक वहां अभियान जारी रहने चाहिए।

खबरों के अनुसार, ट्रंप ने संयम बरतने पर ज़ोर दिया है, क्योंकि उन्हें चिंता है कि तनाव बढ़ने से ईरान के साथ बातचीत बाधित हो सकती है और वैश्विक ईंधन की कीमतों पर असर पड़ सकता है। आगामी चुनावों से पहले मध्य पूर्व में एक और लंबे संघर्ष से बचने का उन पर घरेलू दबाव भी है। इसके विपरीत, नेतन्याहू पर घरेलू स्तर पर इज़राइल के दुश्मनों के खिलाफ़ सैन्य सफलता दिखाने का दबाव है, साथ ही उन्हें वाशिंगटन में अपने प्रमुख सहयोगी के साथ संबंधों को भी संभालना है।

आपसी राजनीतिक दबाव

यह असहमति दोनों देशों की घरेलू राजनीतिक चिंताओं को भी दर्शाती है। ट्रंप को ईंधन की बढ़ती कीमतों और लंबे समय तक चलने वाले क्षेत्रीय युद्ध में अमेरिका के और अधिक उलझने के डर को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। उनकी प्राथमिकता बाजारों को स्थिर करना और ईरान के साथ जल्द ही कोई राजनयिक समाधान निकालना रही है।

वहीं, नेतन्याहू पर इज़राइली मतदाताओं का दबाव है जो हमास द्वारा 7 अक्टूबर को किए गए हमलों के बाद सालों से चल रहे संघर्ष के बाद निर्णायक कार्रवाई चाहते हैं। भारी सैन्य अभियानों के बावजूद, हिज़्बुल्लाह और ईरान के सरकारी ढांचे बरकरार हैं, जिससे इज़राइल में घरेलू निराशा बढ़ रही है।

दबाव में कमज़ोर होता गठबंधन

हालांकि दोनों पक्षों के अधिकारियों ने मतभेदों को कम करके दिखाने की कोशिश की है, लेकिन तनाव अधिक स्पष्ट हो गया है। ट्रंप ने निजी तौर पर इज़राइली हमलों को लेकर निराशा जताई है, जिनसे राजनयिक बातचीत के पटरी से उतरने का खतरा है, जबकि वे हमलों का जवाब देने के इज़राइल के अधिकार को भी मानते हैं। हालांकि, नेतन्याहू का कहना है कि वाशिंगटन के साथ तालमेल मजबूत बना हुआ है और इज़राइल आत्मरक्षा में कार्रवाई कर रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि करीबी सहयोगियों के बीच इस तरह की असहमति असामान्य नहीं है, लेकिन जो बात इस पल को अलग बनाती है, वह यह है कि अब मतभेदों को कितनी खुलकर जाहिर किया जा रहा है। हालांकि दोनों नेता सहयोग पर ज़ोर देते रहे हैं, लेकिन ईरान, लेबनान और हिज़्बुल्लाह से निपटने की उनकी रणनीतियां साफ़ तौर पर पूरी तरह एक जैसी नहीं हैं।

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