Jan Gan Man: West Bengal में BJP की नहीं सनातन की जीत हुई, हिंदू एकता को ध्रुवीकरण की राजनीति कहना गलत

By नीरज कुमार दुबे | May 05, 2026

पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत पर जिस तरह देशभर के साधु-संत खुशियां मना रहे हैं, देशभर के हिंदू एक दूसरे को बधाई दे रहे हैं, गलियों, मोहल्लों और आवासीय सोसाइटियों में यहां तक कि कार्यालयों में भी एक दूसरे को बंगाली मिठाई और झालमुरी खिलाई जा रही है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की नहीं सनातन की जीत हुई है। देखा जाये तो तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले राजनीतिक दलों ने दशकों से अपने वोट बैंक को बचाये रखने की खातिर देश के विभिन्न इलाकों की डेमोग्राफी बदलने दी जिससे हिंदू समाज के लिए तो मुश्किलें बढ़ीं ही साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बढ़ गया था। लेकिन पश्चिम बंगाल में हिंदुओं ने एकजुट होकर जिस तरह ममता बनर्जी की तुष्टिकरण की राजनीति को ध्वस्त किया वह इस तरह की पॉलिटिक्स करने वाले सभी दलों के लिए चेतावनी है कि हिंदू अब जाग गया है, एकजुट हो गया है और यह समझ गया है कि बंटेंगे तो निश्चित रूप से कटेंगे। साथ ही जो लोग पश्चिम बंगाल में हिंदुओं के एकजुट होने को ध्रुवीकरण की राजनीति कह रहे हैं उन्हें अपनी आंखें खोलनी होंगी और समझना होगा कि सनातन आस्था पर प्रहार की कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।

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देखा जाये तो वर्षों से देश की राजनीति में तुष्टिकरण का आरोप एक बड़ा मुद्दा रहा है। कई दलों पर यह आरोप लगता रहा कि उन्होंने संतुलित विकास की बजाय विशेष समूहों को साधने की रणनीति अपनाई। इस प्रकार की राजनीति ने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच अविश्वास को जन्म दिया और कई बार यह धारणा बनी कि बहुसंख्यक समाज की चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। पश्चिम बंगाल के संदर्भ में भी यही विमर्श सामने आया, जहां हिंदुओं ने यह महसूस किया कि उनकी आस्था और पहचान को नजरअंदाज किया गया।

इसलिए जब चुनाव परिणाम सामने आए, तो उसे केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि एक चेतावनी के रूप में भी देखा गया। यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरा कि हिंदू अब केवल नारों या वादों से संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि वह अपनी सांस्कृतिक सुरक्षा और सामाजिक सम्मान को भी उतना ही महत्व देंगे। यदि राजनीतिक दल इन संकेतों को समझकर समावेशी और संतुलित नीतियों पर ध्यान दें तो यह पूरे देश के लिए लाभकारी होगा।

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