ईमानदारी, दृढ़ निश्चय, समर्पण, निष्ठा और हिम्मत की मिसाल थे सरदार पटेल

By श्वेता गोयल | Dec 15, 2020

एक किसान परिवार में गुजरात के नाडियाड में 31 अक्तूबर 1875 को जन्मे सरदार वल्लभ भाई पटेल स्वतंत्र भारत के पहले गृहमंत्री और पहले उप-प्रधानमंत्री थे। उन्होंने गांधी जी के साथ भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उनके जीवन से जुड़े अनेक ऐसे किस्से सुनने-पढ़ने को मिलते रहे हैं, जिससे उनकी ईमानदारी, दृढ़ निश्चय, समर्पण, निष्ठा और हिम्मत की मिसाल मिलती हैं। सरदार पटेल उस समय छोटे ही थे, जब उनकी कांख में एक फोड़ा निकल आया था। फोड़े का खूब इलाज कराया गया किन्तु जब वह किसी भी प्रकार ठीक नहीं हुआ तो एक वैध ने सलाह दी कि इस फोड़े को गर्म सलाख से फोड़ दिया जाए, तभी यह ठीक होगा। अब न ही परिवार के भीतर और न ही किसी अन्य की इतनी हिम्मत हुई कि वह बच्चे को सलाख से दागने की हिम्मत जुटा सके। आखिरकार अविचलित बने रहकर सरदार पटेल ने स्वयं ही लोहे की सलाख को गर्म करके फोड़े पर लगा दिया, जिससे वह फूट गया और कुछ ही दिनों में पूरी तरह ठीक हो गया। उनके इस अद्भुत साहस को देखकर पूरा परिवार और आस-पड़ोस के लोग अचंभित रह गए।

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एक बार उनका संत विनोवा भावे के आश्रम में जाना हुआ, जहां रसोई में उत्तर भारत के किसी गांव से आया एक साधक भोजन व्यवस्था के कार्य से जुड़ा था। सरदार पटेल को आश्रम का विशिष्ट अतिथि जानकर साधक ने उनसे पूछा कि आपके लिए रसोई पक्की बनेगी या कच्ची? सरदार पटेल उसका आशय नहीं समझ सके तो उन्होंने साधक से इसका अभिप्राय पूछा। तब साधक ने उनसे पूछा कि वे कच्चा खाना खाएंगे या पक्का? यह सुनकर सरदार पटेल ने कहा कि कच्चा क्यों खाएंगे, पक्का खाना ही खाएंगे। जब खाना बनने के पश्चात् उनकी थाली में पूरी, कचौरी, मिठाई इत्यादि चीजें परोसी गई तो सरदार पटेल ने सादी रोटी और दाल की मांग की। उस पर साधक ने कहा कि आपसे पूछकर ही आपके लिए पक्की रसोई बनाई गई है। दरअसल उत्तर भारत में दाल, रोटी, सब्जी, चावल इत्यादि सामान्य भोजन को कच्ची रसोई कहा जाता है जबकि पूरी, कचौरी, मिठाई इत्यादि तले-भुने भोजन की श्रेणी में आने वाले भोजन को पक्की रसोई कहा जाता है। उस घटना के बाद सरदार पटेल को उत्तर भारत की कच्ची और पक्की रसोई का अंतर मालूम हुआ। एकीकृत भारत की निर्माता यह महान् शख्सियत 15 दिसम्बर 1950 को चिरनिद्रा में लीन हो गई।

- श्वेता गोयल

(लेखिका शिक्षिका हैं)

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