By अनन्या मिश्रा | Dec 15, 2025
आज ही के दिन यानी की 15 दिसंबर को भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री और 'लौहपुरुष' सरदार वल्लभ भाई पटेल का निधन हो गया था। वह दृढ़ता, निर्णय क्षमता और अटूट देशभक्ति का प्रतीक थे। वह एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने न जंग और न तलवार से बल्कि अपनी अटल इच्छाशक्ति और राजनीतिक बुद्धिमत्ता से 562 रियासतों को एकजुट करके भारत को अखंड बनाया था। देश की आजादी के बाद भारत की जो तस्वीर हम सभी देखते हैं, वह सरदार पटेल के 'लौह संकल्प' का परिणाम है। इसलिए उनको 'भारत का लौह पुरुष' भी कहा जाता है। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
अहमदाबाद के किसान आंदोलन से सरदार पटेल की यात्रा शुरू की और फिर इस यात्रा ने उनको जल्द ही जननेता बना दिया। सरदार पटेल ने किसानों, मजदूरों और आम जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्होंने देश को दिखाया कि राजनीति का असली मतलब सेवा है, न कि सत्ता।
देश की आजादी के बाद भारत के सामने जो सबसे बड़ी चुनौती थी, वह 562 रियासतों को एक देश में जोड़ना था। जहां एक ओर कई रियासतें अलग देश बनने की जिद पर अड़ी थीं। लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल की रणनीतिक कुशलता और दृढ़ इच्छाशक्ति से 'एक भारत' का सपना साकार किया। जूनागढ़, हैदराबाद और कश्मीर जैसी रियासतों को भारतीय संघ में मिलाना किसी युद्ध से कम नहीं था। लेकिन सरदार पटेल ने इस काम को बिना किसी बड़े संघर्ष के संभव कर दिखाया। इस लोहे जैसी इच्छाशक्ति और स्पष्ट निर्णय क्षमता ने सरदार पटेल को 'आयरन मैन ऑफ इंडिया' की उपाधि दिलाई।
हालांकि सरदार पटेल का जीवन सरल था, लेकिन उनको विचार कठोर थे। सरदार पटेल न तो बड़े भाषणों में विश्वास रखते थे, न ही दिखावे में। उनका मानना था कि राष्ट्र निर्माण शब्दों से नहीं बल्कि कर्म से होता है। सरदार पटेल का प्रशासनिक कौशल इतना प्रभावी था कि महात्मा गांधी ने उनको 'भारत का बिस्मार्क' कहा था।
देश को आजादी मिलने के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल देश के पहले गृहमंत्री और उप-प्रधानमंत्री बने थे। उन्होंने कड़े संघर्ष के बाद 562 रियासतों को देश को अखंड भारत बनाया था।
वहीं 15 दिसंबर 1950 को 75 साल की उम्र में सरदार वल्लभभाई पटेल का निधन हो गया था।