देश के पहले गृहमंत्री सरदार पटेल ने राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोया

By देवेन्द्रराज सुथार | Oct 31, 2018

स्वतंत्र भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री व गृहमंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अग्रणी योद्धा व भारत सरकार के आधार स्तंभ थे। आजादी से पहले भारत की राजनीति में इनकी दृढ़ता और कार्यकुशलता ने इन्हें स्थापित किया और आजादी के बाद भारतीय राजनीति में उत्पन्न विपरीत परिस्थितियों को देश के अनुकूल बनाने की क्षमताओं ने सरदार पटेल का कद काफी बड़ा कर दिया। 

इस तरह लौह पुरुष सरदार पटेल ने अत्यंत बुद्धिमानी और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए वी.पी. मेनन और लार्ड माउन्ट बेटेन की सलाह व सहयोग से अंग्रेजों की सारी कुटिल चालों पर पानी फेरकर नवंबर 1947 तक 565 देशी रियासतों में से 562 देशी रियासतों का भारत में शांतिपूर्ण विलय करवा लिया। भारत की आजादी के बाद भी 18 सितंबर 1948 तक हैदराबाद अलग ही था लेकिन, लौह पुरुष सरदार पटेल ने हैदराबाद के निजाम को पाठ पढ़ा दिया और भारतीय सेना ने हैदराबाद को भारत के साथ रहने का रास्ता खोल दिया। कश्मीर समस्या की जड़ सत्ता रही है वहीं 1946 में अब्दुल्ला ने कश्मीर के महाराजा हरि सिंह के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। पटेल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मदद से महाराजा को विलय के लिए तैयार कर दिया।

आजादी के पहले कांग्रेस कार्य समिति ने प्रधानमंत्री चुनने के लिए प्रक्रिया बनायी थी, जिसके तहत आंतरिक चुनावों में जिसे सबसे अधिक मत मिलेंगे वही कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष होगा और वही प्रथम प्रधानमंत्री भी होगा। कांग्रेस के 15 प्रदेशस्तर के अध्यक्षों में से 13 वोट पटेल को मिले थे और केवल एक वोट जवाहर लाल नेहरू को मिला था। लेकिन, गांधी का पुरजोर पक्ष जवाहर लाल नेहरू को कांग्रेस अध्यक्ष व प्रधानमंत्री बनाने को लेकर था। चूंकि गांधी को मॉडर्न विचार बहुत पसंद थे, इन विचारों की झलक उन्हें पटेल की जगह विदेश में पढ़े-लिखे नेहरू में अधिक दिखती थी। वहीं गांधी विदेश नीति को लेकर पटेल से असहमत थे। इस कारण उन्होंने पटेल को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने से इंकार कर दिया व अपने वीटो पॉवर का इस्तेमाल नेहरू के पक्ष में किया। इसको लेकर भारतीय राजनीति में राजेंद्र प्रसाद का यह कथन प्रासंगिक है- 'एक बार फिर गांधी ने अपने चहेते चमकदार चेहरे के लिए अपने विश्वासपात्र सैनिक की कुर्बानी दे दी।' लेकिन, सवाल पटेल को लेकर भी उठते हैं कि उन्होंने इसका विरोध क्यों नहीं किया। आखिर उनके लिए गांधी महत्वपूर्ण था या देश?

निश्चित ही भारत के 2/5 भाग क्षेत्रफल में बसी देशी रियासतों जहां तत्कालीन भारत के 42 करोड़ भारतीयों में से 10 करोड़ 80 लाख की आबादी निवास करती थी, उसे भारत का अभिन्न अंग बना देना कोई मामूली बात नहीं थी। इतिहासकार सरदार पटेल की तुलना बिस्मार्क से भी कई आगे करते हैं क्योंकि बिस्मार्क ने जर्मनी का एकीकरण ताकत के बल पर किया और सरदार पटेल ने ये विलक्षण कारनामा दृढ़ इच्छाशक्ति व साहस के बल पर कर दिखाया। उनके इस अद्वितीय योगदान के कारण 1991 में मरणोपरांत उन्हें ''भारत रत्न'' के सर्वोच्च सम्मान से अलंकृत किया गया। 2018 में सरकार ने गुजरात के नर्मदा नदी पर सरदार वल्लभ भाई पटेल की 597 फीट लंबी (दुनिया की सबसे ऊंची विशालकाय मूर्ति) स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को मूर्त रूप देकर राष्ट्रीय एकता के प्रतीक पुरुष व देश का गौरव बढ़ाया।

-देवेन्द्रराज सुथार

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