Sarojini Naidu Birth Anniversary: देश की पहली महिला Governor थीं सरोजिनी नायडू, साड़ी फाड़कर बनाया था तिरंगा

By अनन्या मिश्रा | Feb 13, 2026

कांग्रेस की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष और देश की पहली महिला राज्यपाल सरोजिनी नायडू का 13 फरवरी को जन्म हुआ था। सरोजिनी नायडू ने अपनी आवाज और कलम के दम पर ब्रिटिश हुकूमत की नींद हराम कर दी थी। उनके नेतृत्व में भारतीय महिलाओं ने जो जज्बा दिखाया था, उसकी मिसाल आज भी पूरी दुनिया में दी जाती है। उन्होंने महिलाओं के समान अधिकार और उनके मताधिकार के बारे में आवाज उठाई थी। वहीं गांधीजी ने सरोजिनी नायडू को 'भारत कोकिला' का खिताब दिया था। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर सरोजिनी नायडू के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में... 

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विवाह

साल 1898 में सरोजिनी नायडू हैदराबाद वापस लौट आईं। फिर साल 1898 में सरोजिनी चट्टोपाध्याय ने गोविंदराजुलु नायडू से विवाह किया और इस तरह से उनके नाम के साथ नायडू जुड़ गया। सरोजिनी नायडू का यह विवाह उस दौर के हिसाब से एक बड़ा क्रांतिकारी कदम था, क्योंकि उन्होंने अंतरजातीय विवाह किया था।

कविता से आजादी की जंग तक

सरोजिनी नायडू की पहचान सिर्फ राजनेता तक नहीं बल्कि उच्च कोटि की कवियत्री थीं। उनका पहला काव्य संग्रह 'द गोल्डन थ्रेशोल्ड' साल 1905 में प्रकाशित हुआ था। इसके अगले 12 सालों तक वह लगातार बहुत मनमोहक कविताएं लिखती रहीं। साल 1912 में सरोजिनी नायडू का दूसरा खंड 'द बर्ड ऑफ टाइम' आया। साल 1917 में 'द ब्रोकन विंग्स' के प्रकाशन के बाद सरोजिनी नायडू के काव्य जीवन में थोड़ा ठहराव आ गया। इसकी वजह यह थी कि सरोजिनी का पूरा ध्यान देश की आजादी की ओर मुड़ चुका था।

महात्मा गांधी ने सरोजिनी नायडू की रचनाओं में लय, रंग और कल्पना का अनूठा संगम देखा। सरोजिनी की जादुई आवाज और शब्दों के चयन के कारण महात्मा गांधी ने उनको 'नाइटिंगल ऑफ इंडिया' यानी 'भारत कोकिला' का खिताब दिया था।

महिलाओं का बलिदान

सरोजिनी नायडू ने 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा को संबोधित करते हुए एक घटना जिक्र किया था। नायडू ने बताया था कि एक बार बर्लिन में अतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान जब ध्वज परेड होनी थी। इस दौरान भारत का कोई आधिकारिक झंडा नहीं था। यह देश के लिए पीड़ा और अपमान का क्षण था। उस दौरान सरोजिनी नायडू के सुझाव पर भारतीय महिला प्रतिनिधियों ने अपनी साड़ियों की पट्टियां फाड़ दीं। उन पट्टियों को जोड़कर एक तिरंगा तैयार किया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का अपमान न हो। यह घटना दिखाती है कि उस दौर की महिलाओं में देशप्रेम का जज्बा किस कदर भरा हुआ था।

यूपी की पहली महिला गवर्नर

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सरोजिनी नायडू कांग्रेस की ताकतवर नेता बनकर उभरी थीं। 01 अगस्त 1920 को गांधीजी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया। इसमें वह सरोजिनी नायडू पूरी ताकत से कूद पड़ीं। उन्होंने देशभर में सैकड़ों सभाओं को संबोधित किया। खासतौर पर वह महिलाओं की बुलंद आवाज बन चुकी थीं। सरोजिनी नायडू की सक्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं कि साल 1925 में वह कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी जाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

देश की आजादी के बाद सरोजिनी नायडू को संयुक्त प्रांत (उत्तर प्रदेश) की पहली महिला राज्यपाल बनाया गया। उन्होंने अपने पूरे करियर में सिर्फ राजनीति ही नहीं बल्कि महिलाओं की आजादी और शिक्षा के लिए जमीन पर काम किया।

सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लड़ाई

सरोजिनी नायडू का मानना था कि सभ्यता के आगे बढ़ने के लिए समाज से लैंगिक भेदभाव खत्म होना जरूरी है। इसके लिए उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय सामाजिक सम्मेलन के दौरान विधवाओं के पुनर्विवाह और शिक्षा के लिए प्रस्ताव पारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सरोजिनी नायडू ने एनी बेसेंट के साथ मिलकर 'महिला भारतीय संघ' की स्थापना की।

मृत्यु

वहीं 02 मार्च 1949 को सरोजिनी नायडू का निधन हो गया था।

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