कल्पना बड़े काम की चीज़ है (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Feb 19, 2021

किसी भी समस्या को हल करने का सबसे सुरक्षित और सफल हथियार कल्पना है। कल्पना कोई भी काम कहीं भी बैठे निबटा सकती है। संक्रमण काल में अनुशासन के कारण घर बैठे बैठे कल्पना के पौधे इतने उग गए कि फेसबुक, व्ह्त्सेप के खेत अभी तक लहलहा रहे हैं। कल्पना कुछ भी करवा सकती है, जैसे हम यह मान सकते हैं कि आम आदमी को सड़क, खेत, झोपडी, आश्रम, शिविर या खोली में कभी कभी खाने को मिलता रहे तो वह हमेशा जीवित रह सकता है। सर्दी के मौसम में छोटे से कमरे में आठ दस बंदे, पानी रहित शौचालय, साबुन रहित हाथ धोना आम आदमी को ज्यादा दुखी नहीं करता।

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यह भी जाना बुझा तथ्य है कि कल्पना दर्द की कहानी को आसानी से आंकड़ों में तब्दील कर सकती है। यह कार्य हमारे विशेषज्ञ बेहतर तरीके से निरंतर करते हैं। यह कल्पना का ठोस धरातल ही है जिस पर प्रेमी अपनी प्रेमिका, भावी पति अपनी भावी पत्नी के लिए सदियों से बार बार कितने तरह के चांद उतार लाया है। असली फूल भी तो उन्हें कल्पना लोक में ही ले जाते हैं। क्या पत्थर में ईश्वर की मान्यता की रचना इंसान की कल्पना का नायाब उदाहरण नहीं। वास्तविकता तो हर एक कठिनाई को मुसीबत में बदल देती है, दुःख के कचरे में गिरे हुए भी हम सुवासित सुख की कल्पना करते हैं। बातों बातों में साबित हो गया न कि कल्पना बड़े काम की चीज़ है, ये बेदाग़ बे दाम की चीज़ है।

- संतोष उत्सुक

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