चारपाई महिमा (व्यंग्य)

By डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ | Jun 29, 2023

भातीय घों में चारपाई को ड्राइंगरूम, सोने का कमरा, गुसुलख़ाना, क़िला, ख़ानक़ाह, ख़ेमा, दवाख़ाना, संदूक़, किताब-घर, शिफ़ाख़ाना, सबकी हैसियत कभी-कभी बेवक्त वर्ना वक़्त पर पता चलती है। कोई मेहमान आया। चारपाई निकाली गई। उसपर एक नई दरी बिछा दी गई जिसके तह के निशान ऐसे मा'लूम होंगे जैसे किसी छोटी सी आराज़ी को मेंडों और नालियों से बहुत से मालिकों में बांट दिया गया है और मेहमान साहब अचकन, टोपी, बैग बुग़ची के बैठ गए और थोड़ी देर के लिए ये मा'लूम करना दुशवार हो गया कि मेहमान बेवक़ूफ़ है या मेज़बान बदनसीब! चारपाई ही पर उनका मुंह हाथ धुलवाया और खाना खिलाया जाएगा और उसी चारपाई पर ये सो रहेंगे। सो जाने के बाद उनपर से मच्छर मक्खी इस तरह उड़ाई जाएगी जैसे कोई फेरी वाला अपने ख़्वांचा पर से झाड़ूनुमा मोरछल से मक्खियाँ उड़ा रहा हो।

चारपाई पर सूखने के लिए अनाज फैलाया जाएगा। जिसपर तमाम दिन चिड़ियाँ हमले करती, दाने चुगती और गालियां सुनती रहेंगी। कोई तक़रीब हुई तो बड़े पैमाने पर चारपाई पर आलू छीले जाएंगे। मुलाज़िमत में पेंशन के क़रीब होते हैं तो जो कुछ रुख़्सत-ए-जमा हुई रहती है उसको लेकर मुलाज़िमत से सुबूकदोश हो जाते हैं। इस तरह चारपाई पेंशन के क़रीब पहुंची है तो उसको किसी काल कोठरी में दाख़िल कर देते हैं और उसपर साल भर का प्याज़ का ज़ख़ीरा जमा कर दिया जाता था। एक दफ़ा देहात के एक मेज़बान ने प्याज़ हटाकर उस ख़ाकसार को ऐसी ही एक पेंशन याफ़्ता चारपाई पर उसी काल कोठरी में बिछा दिया था और प्याज़ को चारपाई के नीचे इकट्ठा कर दिया गया था। उस रात को मुझपर आसमान के उतने ही तबक़ रौशन हो गए थे जितनी सारी प्याज़ों में छिलके थे और यक़ीनन चौदह से ज़्यादा थे।

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फ़िराक़ और विसाल, बीमारी-व-तंदुरुस्ती, तस्नीफ़-व-तालीफ़, सिर्क़ा और शायरी सबसे चारपाई ही पर निपटते हैं। बच्चे बूढ़े और मरीज़ उसको बतौर पाख़ाना-ए-गुसुलख़ाना काम में लाते हैं। कभी अदवान कुशादा करदी गई। कभी बुना हुआ हिस्सा काट दिया गया और काम बन गया। पुख़्ता फ़र्श पर घसीटिए तो मा'लूम हो कोई मिल्ट्री टैंक मुहिम पर जा रहा है या बिजली का तड़ाक़ा हो रहा है, खटमलों से निजात पाने के लिए जो तरकीबें की जाती हैं और जिस-जिस आसन में चारपाई नज़र आती है या जो सुलूक उसके साथ रवा रखा जाता है उनपर ग़ौर कर लीजिए तो ऐसा मा'लूम होता है जैसे हिंदोस्तानी बीवी का परिचय हिंदोस्तानियों ने चारपाई ही से लिया है! 

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’,

(हिंदी अकादमी, मुंबई से सम्मानित नवयुवा व्यंग्यकार)

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