प्रबंधन का कूड़ा (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Dec 30, 2024

कूड़े का प्रबंधन नहीं हो पा रहा है। आम जनता को अस्वीकार्य है, कोई उन्हें कहे कि कूड़ा ऐसे दो या वैसे दो, यहां मत फेंको और वहां भी मत फेंको। असली परेशानी तो शासन और प्रशासन को होती है जब आम लोग भी छोटी सी बात नहीं मानते। आधारभूत ढांचा ही कई साल में तैयार नहीं हो पाता। बजट आता है और हर कहीं चला जाता है ।


वक़्त ने फिर करवट ली और नगर निगम में नए सख्त आयुक्त को नियुक्त किया गया। सुना गया नए होने के कारण उनमें गज़ब का जोश खरोश है। इस नियुक्ति के दौरान वे वाकई कुछ करके दिखाना चाहते हैं। पहली ही बैठक में उन्होंने हाथ उठाकर और घुमाकर शहर की सफाई व्यवस्था को चाकचौबंद करने के बहुत ज्यादा सख्त निर्देश दिए। जिन्हें हिंदी में भी कहा गया ताकि सभी को समझ आ जाए। कुछ लोगों को लगा कि चाकचौबंद पुराना शब्द है इसकी जगह कहें, सफाई व्यवस्था को पहले से बेहतर रखा जाए। 

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डोर टू डोर कूड़ा उठाने, कूड़े के निस्तारण, यूज़र चार्जेज की जानकारी फिर से बांटी गई। यह जानकारी पहले भी दर्जनों बार दी गई है। जानकारी अच्छी चीज़ होती है, जितनी दी जाए कम होती है और जितनी मिल जाए संभालनी मुश्किल होती है। नए अधिकारी ने बड़ी, नई, ज़्यादा आरामदायक कुर्सी पर पसर कर कहा, सबसे पहले क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाले भवनों का डाटा तत्काल तैयार किया जाए। इससे पता चल सकेगा कि कितने भवन हैं। किस भवन में कितने परिवार रहते हैं। उन परिवारों में कितने सदस्य हैं। कितने लोग कूड़ा डोर टू डोर स्कीम में दे रहे हैं। कितने परिवार नहीं दे रहे हैं। जो परिवार नहीं दे रहे जान बूझ कर नहीं दे रहे या किसी और कारण से नहीं दे पा रहे। यह भी जांचना होगा कि कूड़ा देने वाले गीला और सूखा कूड़ा अलग अलग क्यूं नहीं दे रहे और कूड़ा लेने वाले क्यूं नहीं ले रहे।  


कूड़ा न देने वालों के पारिवारिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक या राजनीतिक कारणों का पता कर ऑनलाइन किया जाए। इससे वास्तविक डाटा तैयार होगा। इससे कूड़ा न देने वालों की मानसिकता का गहन अध्ययन करने में आधारभूत मदद मिलेगी। उन्होंने कूड़ा उठाने वाली अधिकृत कम्पनियों को निर्देश दिए, वार्ड के अनुसार बांटे हर घर से किसी भी स्थिति में कूड़ा उठाया जाए। इस आदेश को ठेकेदारों ने सुनते ही भुला दिया। नए अधिकारी ने कहा, सफाई से सम्बंधित सभी शिकायतों को जल्दी निबटाया जाए। 


सख्त लेकिन समझदार अधिकारी ने शहर के बाहर फेंके जा रही भवन निर्माण सामग्री के कचरे बारे कुछ नहीं कहा। शहर के कुप्रभावशाली व्यवसायियों बारे भी कुछ नहीं कहा जो हर रात बाज़ार को कूड़े से भर देते हैं। समय कम रह गया था, सभी ने घर जाना था, इसलिए कूड़े से सम्बंधित बाक़ी विचारों का तत्काल विसर्जन कर दिया गया।

 

- संतोष उत्सुक

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