महंगाई डायन खाए जात है (व्यंग्य)

By डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ | Nov 24, 2022

मौसी: क्या बताए बेटा, 400 रुपए वाला सिलेंडर 1200 रुपए, साठ रुपए वाला पेट्रोल 109 रुपए, 399 रुपए वाला मोबइल रिचार्ज 599 रुपए, 200 रुपए वाला टीवी रिचार्ज 450 रुपए, 3 रुपए का प्लाटफार्म टिकट 50 रुपए और 60 रुपए वाला खाने का तेल 200 रुपए हो गया। लगता है महंगाई की होड़ जेट स्पीड से है। अब तुम्हीं बताओ बेटा हम जैसे लोग कैसे जिएँ?  


जय: अरे मौसी! जेट में बैठने का सुख सभी को नसीब थोड़ी न होता है। वह तो हम सब किस्मत वाले हैं कि जीते जी महंगाई की जेट स्पीड का मजा उठा रहे हैं। महंगाई को महंगाई मत कहो। यह तो देशभक्ति है देशभक्ति! 


मौसी: वो कैसे बेटा? 


जय: मौसी! वेदों-पुराणों में लिखा है कि देशभक्ति तन-मन-धन से की जानी चाहिए। तन तो हमारे पास है। मन की बात कोई और करता है। जहाँ तक सवाल धन का है तो इसके लिए सीधी उंगली या फिर टेढ़ी उंगली का इस्तेमाल करना होगा। जो लोग देशभक्ति के लिए दान-धर्म नहीं कर सकते या नहीं करना चाहते उनसे सिलेंडर, पेट्रोल, डीजल, मोबाइल, टीवी, प्लाटफार्म, खाने का तेल आदि की कीमतें बढ़ाकर वसूली करना होगा। इस तरह से देशभक्ति के लिए की गई वसूली शास्त्रों में पाप नहीं माना जाता। सरकार महंगाई के बहाने हमारे हाथों पुण्य करवा रही है।

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मौसी: यह तो मैंने सोचा ही नहीं था बेटा! अब इतना भी बता दो कि ऐसी देशभक्ति भी किस काम की जिसमें जीना हराम हो जाए। खाने के लाले पड़ जाएँ। अब तुम्हीं बताओ महंगाई की देशभक्ति से वसूला पैसा किस काम का?


जय: बड़ी भोली है मौसी आप! चार दिन की जिंदगी में काहे की महंगाई काहे की गरीबी। चार दिन के बाद तो यह किचकिच खत्म हो जाएगी। लेकिन याद रखो मौसी! हम रहें न रहें देश रहना चाहिए। और यह देश यूँ ही अखंड नहीं रह सकता। इसके लिए शक्तिशाली सरकार की आवश्यकता पड़ती है। देश में अपनी सरकार बनाए रखने के लिए केवल चुनाव जीतना काफी नहीं होता। सरकार के और भी कई सारे जरूरी काम होते हैं। मसलन एमएलए, एमपी की खरोद-फरोख्त करनी होती। उन पर मुंहमांगा पैसा लुटाना पड़ता है। इस तरह जाकर सुव्यवस्थित सरकार बनती है। देश अखंड बनता है।   


मौसी: एक बात की दाद दूँगी बेटा! भले ही 400 रुपए वाला सिलेंडर 1200 रपए, साठ रुपए वाला पेट्रोल 109 रुपए, 399 रुपए वाला मोबइल रिचार्ज 599 रुपए, 200 रुपए वाला टीवी रिचार्ज 450 रुपए, 3 रुपए का प्लाटफार्म टिकट 50 रुपए और 60 रुपए वाला खाने का तेल 200 रुपए हो गया लेकिन तुम्हारे मुँह से सरकार के लिए तारीफ़ ही निकलती है । 


जय: अब क्या करें मौसी! तारीफ़ नहीं करेंगे तो देश के गद्दार कहलायेंगे। अब देश में देशभक्त होने की एक ही निशानी है सरकार जो कह रही है उसकी हाँ में हाँ मिलाओ। जो कर रही है उसे करने दो। क्योंकि सरकार आँखों से सुरमा नहीं आँखें ही चुरा लेती है। सरकार के लिए जो दोस्त हैं, वह उनके लिए ताकत है और जो दुश्मन हैं उनके लिए बड़ी आफत है। सरकार के हर काम में देशभक्ति मौसी! इसलिए आँखें मूँदों और अपना काम करते जाओ। क्योंकि जो हो रहा है, अच्छा हो रहा है। जो होगा वो भी अच्छा होगा तुम अतीत का पश्चाताप न करो मौसी! और न भविष्य की चिंता करो, प्रवासी मजदूरों की तरह वर्तमान चल रहा है।


मौसी: सच कहते हो बेटा! हम एक बार जीते हैं। एक बार मरते हैं। और देशभक्ति दिखाने का अवसर बार-बार नहीं मिलता। जिस देश में महंगाई देशभक्ति बन जाए उस देश में जीने वाले फौलादी कहलाते हैं। मुझे गर्व है कि मेरी देशभक्ति फौलादी है। 


जय: यह हुई न बात! तुम तो शोले की फिल्म वाली मौसी से ज्यादा समझदार हो। 


- डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’

(हिंदी अकादमी, मुंबई से सम्मानित नवयुवा व्यंग्यकार)

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