मिनिमलिज्म (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Feb 24, 2026

यह शब्द बोलने में अजीब सा है जिसका अर्थ है सादा जीवन व्यतीत करना, केवल ज़रूरी चीज़ों के साथ जीना, गैर ज़रूरी चीज़ों का दबाव हटाना। कम चीज़ों से ज्यादा ख़ुशी मिलती है, ज़िंदगी को अर्थ देती हैं, तनाव कम होता है, ध्यान केन्द्रित रहता है। यह बात आज के विकसित, सुविधावादी युग में सार्थक नहीं लगती। आजकल ऐसा करना तो क्या सोचना भी मुश्किल है। यह तो प्रवचन ही लगता है। अब तो सपने भी ऑनलाइन शापिंग के आते हैं, नए नए स्वाद लुभाते हैं । 

इसे भी पढ़ें: ज़िंदगी और छुट्टियां (व्यंग्य)

अरे यार, कुदरत से प्रेरित होकर इंसान ने ही इतने खूबसूरत रंग बनाए हैं। उन्हें कब पहनेंगे। कलाकारों, डिज़ाइनर्स और तकनीक ने आकर्षक कपड़े सजाए हैं। महिलाओं के लिए तो छोटे से छोटे, मंहगे से महंगे वस्त्र बनाए हैं उनका मज़ा कब लेंगे। अगला जन्म तो सिर्फ ख्याल है, असली ज़िंदगी तो सिर्फ एक बार ही मिलनी है। मान लो, अगला जन्म मिला, योनी बदली, गधे बने तो। वस्तुएं कम करने वाले कहते हैं कि इनसे प्राप्त होने वाली खुशी अस्थायी है। अनुभव, लम्बी व स्थाई खुशी देते हैं। शायद इन लोगों को पता नहीं कि जीवन में खुशियां  कम हैं और दुःख ज़्यादा।  मकान, कार, सोना हासिल करने का अनुभव किस अनुभव से कम है। चौरासी किलोमीटर जाकर स्वादिष्ट खाने का अनुभव ही बरसों नहीं भूलता।  

कम उपभोग करने वाली जीवन शैली के वकील कहते हैं कि कम चीज़ों वाले ज्यादा शांति और संतुष्टि महसूस करते हैं। घर साफ़ सुथरा शांत दिखता होता है। पूरा ध्यान आपसी रिश्तों पर जाता है। व्यक्ति भावनात्मक ऊर्जा प्राप्त करता है। लेकिन ज़्यादा चीज़ों से घर भरा भरा लगता है, सकारात्मकता आती है कि मैं इतनी चीज़ों का स्वामी हूं। ज्यादा साफ़ सफाई भी तो एक तरह का संक्रमण फैलाती है । घर से बाहर का वातावरण और पर्यावरण तो कूड़ा कचरा पूर्ण ही है न। उन लोगों को क्यूं नहीं समझाया जाता जो नए नए आविष्कार करते रहते हैं। पिछले दिनों मेरी पत्नी सेब काटने की मशीन मंगाने की इच्छा जता रही थी, जिसे मैंने सामान कम करने की शुरुआत मानकर नहीं मंगाया। उनसे वायदा किया कि सेब भी मैं ही काट दिया करूंगा लेकिन बाज़ार में किन्नू और संतरों की भरमार होते ही नया जूसर खरीदना पड़ा क्यूंकि पुराना खराब था।  जूसर में रस फलों का निकला, तेल मेरी जेब का और असली चीज़ जो सेहत के लिए लाभदायक होती है यानी फाइबर, कचरा पेटी में गया। शिक्षा यह मिली कि खूब चीज़ों का मैक्सिमम मज़ा लो।  

- संतोष उत्सुक

प्रमुख खबरें

Nag Panchami 2026: कब है नाग पंचमी? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त, महत्व, कथा, मंत्र और पूजा विधि

Women Reservation Bill पर बोले DK Shivakumar- Kiren Rijiju को कांग्रेस की चिंता करने की ज़रूरत नहीं

उद्धव ठाकरे का केंद्र पर तीखा हमला: पुलिस कार्रवाई की Jallianwala Bagh से की तुलना, PM Modi और HM Shah से मांगे जवाब

ढाका की राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों की नई परीक्षा