टोपी पहनाने वाले (व्यंग्य)

By डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ | Nov 26, 2022

नेताजी सेक्रेटरी के रग-रग से वाकिफ़ थे। उन्होंने सेक्रेटरी की चिंता का कारण पूछा। सेक्रेटरी ने कहा– साहब! पाँच साल पहले आप इसी तरह तैयार होकर भाषण देने गए थे और सौभाग्य से विधायक भी बन गए। लेकिन सच्चाई यह है कि आपका किया एक भी वादा पूरा नहीं हुआ। अब हम किस मुँह से जनता का सामना करेंगे? अगर कहीं जनता भड़क गयी तो लेने के देने पड़ जायेंगे। 

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पाँच साल तक इनका जितना कश लगाया जा सकता है, लगाओ और किए हुए वादों को धुएँ के माफिक़ हवा में गायब हो जाने दो। जनता हमेशा आज में जीती है। इसलिए तुम चिंता मत करो। मेरे पास जनता को बहलाने के बहुत सारे वादे हैं। वादों के दो बिस्कुट फेंकते ही कुत्ते की तरह दुम हिलाते हुए मेरे आगे-पीछे हिलने-डुलने लगेगी। सो जल्दी करो, कहीं दूसरे नेताजी आकर हमसे बड़ा वादा न कर जाएँ। 

- डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’

(हिंदी अकादमी, मुंबई से सम्मानित नवयुवा व्यंग्यकार)

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