पाकिस्तान में 'संविधान बचाओ' आंदोलन, 27वें संशोधन पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

By एकता | Nov 09, 2025

पाकिस्तान की संसद में प्रस्तावित 27वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक घमासान मच गया है। जहां सरकार इसे पारित करने की तैयारी में है, वहीं विपक्षी गठबंधन ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'संविधान की नींव हिलाने' वाला बताया है और इसके खिलाफ रविवार से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है।

इसके अलावा, संशोधन में न्यायपालिका में बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं, जैसे एक संघीय संवैधानिक न्यायालय की स्थापना करना और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में संशोधन करना, साथ ही, उच्चतम न्यायालय की शक्तियों को कम करते हुए कुछ प्राधिकारों को प्रस्तावित संवैधानिक न्यायालय में स्थानांतरित करने का भी प्रस्ताव है। इन सबके अतिरिक्त, एक विवादास्पद प्रस्ताव के तहत राष्ट्रपति को आजीवन आपराधिक कार्यवाही से मुक्ति प्रदान करने का प्रावधान भी शामिल है।

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संसदीय प्रक्रिया और सरकार की उम्मीद

इस संबंध में संसदीय प्रक्रिया चल रही है, जहां कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने शनिवार को ऊपरी सदन सीनेट में संशोधन विधेयक पेश किया है, जिसे सभापति यूसुफ रजा गिलानी ने आगे की चर्चा के लिए सदन की समिति के पास भेज दिया है। सरकार को उम्मीद है कि सोमवार को होने वाले मतदान में उसे कम से कम 64 सीनेटर का दो-तिहाई बहुमत मिल जाएगा, सीनेट से पारित होने के बाद, इसे नेशनल असेंबली में दो-तिहाई बहुमत से पास कराना होगा और अंत में इसे कानून बनने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी अनिवार्य होगी।

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विपक्ष का 'संविधान बचाओ' आंदोलन

प्रस्तावित 27वें संविधान संशोधन के विरोध में, बहुदलीय विपक्षी गठबंधन तहरीक-ए-तहाफुज आईन-ए-पाकिस्तान (TTAP) ने देशव्यापी विरोध आंदोलन की घोषणा की है। इस गठबंधन में जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के साथ-साथ मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन (MWM), पश्तूनख्वा मिल्ली अवामी पार्टी (PKMAP), बलूचिस्तान नेशनल पार्टी-मेंगल (BNP-M) और सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल (SIC) जैसी पार्टियाँ शामिल हैं। इस विरोध के दौरान, MWM के प्रमुख अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक संस्थाएं पंगु हो गई हैं... राष्ट्र को (प्रस्तावित) 27वें संशोधन के खिलाफ कदम उठाना चाहिए।

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