By दिव्यांशी भदौरिया | Jul 27, 2026
हिंदू धर्म में सूर्य और चंद्र ग्रहण की घटना को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार सावन के महीने में दो बड़े ग्रहण लगने जा रहे हैं। विज्ञान में ग्रहण को खगोलीय घटना मानी जाती है। दरअसल, 12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण और 27-28 अगस्त 2026 को आंशिक चंद्र ग्रहण लगने वाला है। ग्रह को ज्योतिष में बेहद खास माना जाता है।
भारत पर क्या होगा प्रभाव?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य ग्रहण के चलते शासन, प्रशासन और नीतियों पर ज्यादा ध्यान रहने वाला है। इस दौरान सरकारें अपनी बड़ी योजनाओं की फिर से समीक्षा कर सकती हैं। राजनीतिक चर्चाएं और जन बहस काफी तेज हो सकती हैं। बड़े विकास कार्यों को आगे बढ़ाने से पहले उन पर दोबारा विचार किया जाएगा।
दूसरी तरफ, चंद्र ग्रहण के कारण लोगों की भावनाएं संवेदनशील हो सकती हैं। जिसके चलते सामाजिक कल्याण, सेहत, खेती और पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी बातों पर चर्चा बढ़ सकती है। पानी और पर्यावरण से संबंधित मामलों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
जब ग्रहण लगता है, तो इस अवधि में शेयर बाजार और पैसों के मामलों में थोड़ा संभलकर चलने का होता है। निवेशक और व्यापारी काफी सोच-समझकर कदम बढ़ाते हैं। इतना ही नहीं, सरकारें भी बड़े बदलाव करने के स्थान पर अपनी पुरानी आर्थिक नीतियों को मजबूत करने पर ध्यान देती हैं। टेक्नोलॉजी, सेहत, ऊर्जा, खेती और जरुरी सेवाओं से जुड़े क्षेत्र इस अवधि में अधिक चर्चा हो सकती है।
राजनैतिक और कूटनितिक हलचल
सूर्य और चंद्र ग्रहण के प्रभाव से दुनिया भर की सरकारें अपनी कूटनीतिक रणनीतियों का फिर से आकलन कर सकती हैं। इन लोगों का पूरा ध्यान लंबे समय तक चलने वाली पार्टनरशिप पर रहेगा। मुख्य बातचीत, नीतियों की समीक्षा और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर काम तेज होगा।
मौसम और प्राकृतिक घटनाएं
ग्रहण के कारण दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश, बाढ़, सूखे से निपटना और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। बता दें कि, यह सभी पारंपरिक ज्योतिषीय आकलन हैं।
आध्यात्मिक महत्व
गौरतलब है कि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है,जो इसे सभी भक्तों के लिए काफी पवित्र माना जाता है। ग्रहण का यह समय पूजा-पाठ, ध्यान, मंत्र जाप और खुद के अंदर झांकने के लिए काफी बढ़िया माना जाता है। भूलकर भी इस समय कोई भी नए और बड़े काम की शुरुआत न करें।