By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 13, 2020
पीठ ने याचिकाकर्ताओं को इस छूट के साथ याचिका वापस लेने की अनुमति दी कि वे शीर्ष अदालत के अलावा अन्यउचित न्यायिक मंच पर जा सकते हैं। धवन ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संक्षिप्त सुनवाई में कहा कि याचिकाकर्ता इस चरण पर इस छूट के साथ याचिका वापस लेना चाहते हैं कि उन्हें दुबारा, हो सकता है दो महीने बाद, शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाने की अनुमति दी जाए। याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय में ‘‘अदालत को बदनाम करने’’ को लेकर आपराधिक अवमानना से जुड़े न्यायालय की अवमानना कानून की धारा 2 (सी)(1) की संवैधानिक वैधता को संविधान के अनुच्छेद 19 में प्रदत्त अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार के संदर्भ में चुनौती दी थी।
इससे पहले, आठ अगस्त को, भरोसेमंद सूत्रों ने बताया था कि उच्चतम न्यायालय प्रशासन ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरूण शौरी, वरिष्ठ पत्रकार एन. राम और कार्यकर्ता एवं वकील प्रशांत भूषण की तरफ से दायर याचिका 10अगस्त को न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति के. एम. जोसफ की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने को लेकर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि, उसी दिन यह मामला कार्यसूची से हटा दिया गया था। बाद में यह मामला न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष यह मामला सूचीबद्ध हुआ जो पहले से ही प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना के दो अलग-अलग मामलों को देख रही थी।