केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की योजनाओं को संघीय ढांचे की रक्षा करनी चाहिए: संसदीय समिति

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 24, 2022

नयी दिल्ली। संसद की एक समिति ने सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए एक अलग सहकारिता मंत्रालय बनाने के केंद्र के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन आगाह किया है कि राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रमों को तैयार करते समय “अत्यधिक विवेक” का प्रयोग किया जाना चाहिए ताकि देश की संघीय विशेषताएं ‘प्रभावित’ न हों। कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण पर स्थायी समिति ने बृहस्पतिवार को सहकारिता मंत्रालय के लिए अनुदान की मांग से संबंध के बारे में अपनी रिपोर्ट संसद में पेश की। समिति ने सहकारिता से समृद्धि की ओर दृष्टि को साकार करने के मकसद से देश में सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक अलग सहकारिता मंत्रालय बनाने के सरकार के फैसले पर खुशी व्यक्त की।

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समिति ने मंत्रालय की नई नीतिगत पहलों का भी स्वागत किया और आशा व्यक्त की कि नई राष्ट्रीय सहयोग नीति मुद्दों के गहन विश्लेषण के बाद विकसित की जाएगी और क्षेत्र में सभी अंशधारकों के साथ व्यापक परामर्श के माध्यम से सुधारात्मक उपचारात्मक उपायों को अंतिम रूप दिया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘मंत्रालय के अनुसार, सहकारी क्षेत्र प्रभावी प्रशासन की कमी, नेतृत्व और पेशेवर प्रबंधन, निम्न स्तर के प्रौद्योगिकी अपनाने आदि जैसे गंभीर मुद्दों का सामना कर रहा है, जिससे सहकारी समितियों का त्वरित और समान विकास प्रभावित हो रहा है। समिति को यकीन है कि ये बाधाएं हैं किसी भी तरह से हटाने की जरूरत है।

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