भारतीय डाक विभाग का सिंधिया ने कर दिया कायाकल्प, गांव से ग्लोबल तक पहुँच हुई और आसान

By नीरज कुमार दुबे | Feb 24, 2026

भारतीय डाक अब सिर्फ चिट्ठी-पत्री पहुंचाने वाला विभाग नहीं रहा बल्कि यह तेज, तकनीक-सक्षम और बहुआयामी सेवा नेटवर्क में बदल चुका है। इस बदलाव के केंद्र में संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की स्पष्ट सोच, कड़े फैसले और आधुनिक दृष्टि दिखाई देती है। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में डाक विभाग ने अपने कामकाज को तीन बड़े स्तंभों पर खड़ा किया है। इसके तहत राजस्व बढ़ाने, कामकाज की गति को तेज और आसान बनाने तथा जमीनी स्तर पर कर्मचारियों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

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‘24 स्पीड पोस्ट पार्सल’ सेवा के तहत अब बड़े शहरों के बीच अगले दिन डिलीवरी यानि 24 घंटे के भीतर सामान पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में इसका पायलट चल रहा है और 95% से अधिक डिलीवरी सफलता दर हासिल की गई है। इस सेवा के तहत पैकेजिंग को नया रूप दिया गया है, पोस्टमैन बैग बदले गए हैं और RFID व टेलीमैटिक्स जैसी तकनीक अपनाई जा रही है। स्पीड पोस्ट और रजिस्टर्ड पोस्ट को मिलाकर प्रक्रियाएं सरल भी की गई हैं। दूरदराज इलाकों में ड्रोन से डिलीवरी का पायलट चल रहा है, जबकि महानगरों में ई-वाहनों से लास्ट माइल डिलीवरी शुरू की गई है।

इसके अलावा, निर्यात और MSME को नई ताकत देने के लिए देशभर में 1000 से अधिक ‘डाक निर्यात केंद्र’ बनाए गए हैं। इनके माध्यम से 13 लाख कंसाइनमेंट भेजे गए, जिनकी कुल निर्यात कीमत 303 करोड़ रुपये रही और 135 देशों तक सामान पहुंचाया गया। अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के लिए विशेष पायलट भी चल रहा है।

डाकघर मल्टी-सर्विस सेंटर के रूप में भी तेजी से काम कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, आधार नामांकन केंद्रों ने अब तक 14.45 करोड़ लेन-देन किए हैं। पासपोर्ट सेवा केंद्रों में 2.05 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए। 13,000 से अधिक डाकघरों में KYC सेवाएं दी जा रही हैं। साथ ही BSNL, SIDBI, AMFI, BSE और NSE के साथ समझौते कर डाकघरों को वित्तीय और डिजिटल सेवाओं का केंद्र बनाया गया है।

इसके अलावा, बीमा और बैंकिंग में भी विस्तार किया जा रहा है। अभी डाक जीवन बीमा की 1.24 करोड़ सक्रिय पॉलिसियां हैं और 2.27 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति प्रबंधन में है। विभाग ने 2028-29 तक 70% कामकाज ऑनलाइन करने का लक्ष्य रखा है। आंकड़ों के मुताबिक, डाक बचत बैंक में 37.36 करोड़ खाते हैं और इनमें 21.77 लाख करोड़ रुपये जमा हैं। इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक के 12.91 करोड़ खाते हो चुके हैं। ई-केवाईसी और वीडियो केवाईसी जैसी डिजिटल सुविधाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं।

तकनीक और ढांचे में सुधार की बात करें तो डाकघरों का पुनर्गठन किया गया है। स्पीड पोस्ट और रजिस्टर्ड पोस्ट की प्रोसेसिंग को एक किया गया है। नए एर्गोनोमिक काउंटर, स्मार्ट बुकिंग मशीन और मोबाइल-वेब चैनल शुरू किए गए हैं। साथ ही ग्रामीण डाक सेवकों के सम्मान और संवाद के लिए देशभर में GDS सम्मेलन आयोजित किए गए, जिनमें 8,000 से अधिक कर्मचारियों ने भाग लिया। विभाग के सूत्रों का कहना है कि मार्च 2026 तक 100 “एन-जन” पोस्ट ऑफिस शैक्षणिक परिसरों में खोले जाएंगे, जहां वाई-फाई, कॉफी कॉर्नर और आधुनिक डिजाइन जैसी सुविधाएं होंगी। इसका लाभ यह होगा कि माता पिता अपने बच्चों को कोई सामान सीधे उनके शैक्षणिक संस्थान के भीतर स्थित डाक घर में भेज सकेंगे और छात्र भी कोई सामान उसी डाक घर से बाहर भेज सकेंगे।

देखा जाये तो केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया इन सुधारों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन को जमीन पर उतारते दिख रहे हैं, जिसमें सरकारी सेवाएं सस्ती, सुलभ और डिजिटल हों। ‘डिजिटल इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘सबका साथ, सबका विकास’ जैसे अभियानों की झलक डाक विभाग के इस कायाकल्प में स्पष्ट दिखाई देती है। गांव-गांव तक फैले डाक नेटवर्क को डिजिटल पहचान, बैंकिंग, बीमा, निर्यात और ई-कॉमर्स से जोड़कर आम नागरिक को उसके घर के पास ही आधुनिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कम लागत में तेज सेवा, तकनीक आधारित पारदर्शिता और अंतिम पंक्ति तक पहुंच, यही वह मॉडल है, जिसके जरिए डाक विभाग को नए जमाने की जरूरतों के अनुरूप ढाला जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि भारतीय डाक विभाग कभी धीमी और परंपरागत व्यवस्था का प्रतीक माना जाता था। लेकिन आज तस्वीर बदल रही है। यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि ठोस रणनीति, तकनीकी निवेश और कड़े प्रशासनिक फैसलों का परिणाम है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने डाक विभाग को सिर्फ सरकारी दफ्तर नहीं, बल्कि एक सेवा-आधारित, प्रतिस्पर्धी और आधुनिक संस्था बना दिया है। राजस्व के नए स्रोत खोलना, निजी क्षेत्र से साझेदारी करना, डिजिटल तकनीक अपनाना और कर्मचारियों को साथ लेकर चलना, आदि जैसे कदम इस बदलाव की रीढ़ हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि गांव से लेकर महानगर तक डाकघर अब बहु-सेवा केंद्र बनते जा रहे हैं। इसके अलावा, तकनीक के माध्यम से डाक विभाग कैसे सेवाएं आसान बना सकता है इसके लिए पहली बार सीटीओ की भी नियुक्ति की गयी है।

बहरहाल, अगर यही गति बनी रही, तो भारतीय डाक विभाग न केवल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक उदाहरण बन सकता है। यह परिवर्तन केवल नीतियों का नहीं, सोच का बदलाव है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

-नीरज कुमार दुबे

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