प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में डिजिटल क्रांति का हुआ अभूतपूर्व विस्तार: सिंधिया

Jyotiraditya Scindia
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सिंधिया ने बताया कि ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी की प्रमुख योजना भारतनेट के तहत देश की 2.56 लाख ग्राम पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा रही है। भारतनेट I और II के अंतर्गत लगभग ₹42,000 करोड़ के निवेश से 2.14 लाख ग्राम पंचायतों को सेवा के लिए तैयार किया जा चुका है।

संसद भवन, नई दिल्ली। केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज संसद में प्रश्नों के उत्तर देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में भारत के डिजिटल इकोसिस्टम में आए ऐतिहासिक बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतनेट विश्व की सबसे महत्वाकांक्षी कनेक्टिविटी योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य देश के हर नागरिक तक सस्ती और तेज इंटरनेट सुविधा पहुँचाना है।

मोबाइल, इंटरनेट और ब्रॉडबैंड में अभूतपूर्व विस्तार

केन्द्रीय मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि वर्ष 2014 में देश में 93 करोड़ मोबाइल उपभोक्ता थे, जो आज बढ़कर 120 करोड़ हो चुके हैं और मोबाइल पेनिट्रेशन 75 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत तक पहुँच गया है। इंटरनेट कनेक्टिविटी में भी क्रांतिकारी बदलाव आया है। इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 2014 के 25 करोड़ से बढ़कर आज 100 करोड़ से अधिक हो गई है, और पेनिट्रेशन 20 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 71.8 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है। इसी तरह, ब्रॉडबैंड उपभोक्ता 6 करोड़ से बढ़कर 100 करोड़ से अधिक हो गए हैं, जबकि औसत ब्रॉडबैंड स्पीड लगभग 66 एमबीपीएस तक पहुँच चुकी है। सिंधिया ने इसे डिजिटल क्रांति बताते हुए कहा कि कनेक्टिविटी अब शहरी विशेषाधिकार नहीं रही, बल्कि ग्रामीण भारत तक पहुँचने वाला नागरिक अधिकार बन चुकी है।

ग्राम पंचायतों को कनेक्टिविटी से जोड़ने का ऐतिहासिक अभियान है भारतनेट

सिंधिया ने बताया कि ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी की प्रमुख योजना भारतनेट के तहत देश की 2.56 लाख ग्राम पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा रही है। भारतनेट I और II के अंतर्गत लगभग ₹42,000 करोड़ के निवेश से 2.14 लाख ग्राम पंचायतों को सेवा के लिए तैयार किया जा चुका है। अमेंडेड भारतनेट प्रोग्राम, जिसकी कुल लागत लगभग 16.9 बिलियन डॉलर है, आज विश्व की सबसे बड़ी ग्रामीण कनेक्टिविटी पहल बन चुका है। इसका लक्ष्य शेष क्षेत्रों को जोड़कर अंतिम छोर तक निर्बाध इंटरनेट सुविधा सुनिश्चित करना है।

उन्होंने सदन को यह भी बताया कि नेटवर्क आर्किटेक्चर को लाइन टोपोलॉजी से रिंग टोपोलॉजी मॉडल में उन्नत किया जा रहा है। इस बदलाव से यदि किसी एक दिशा से कनेक्टिविटी बाधित होती है, तो दूसरी दिशा से सेवाएँ निर्बाध जारी रहेंगी, जिससे नेटवर्क की विश्वसनीयता और अपटाइम में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन के तहत तमिलनाडु में तेजी की आवश्यकता

तमिलनाडु के संदर्भ में सिंधिया ने सदन को बताया कि राज्य ने भारतनेट को विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के माध्यम से लागू करने का विकल्प चुना। राज्य की 12,525 ग्राम पंचायतों में से 10,886 को जोड़ा जा चुका है। शेष ग्राम पंचायतों और 4,767 गैर-ग्राम पंचायत गाँवों को संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत जोड़ा जाएगा।

हालाँकि, मंत्री ने राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन के तहत कार्यान्वयन में आ रही राइट ऑफ वे (RoW) स्वीकृति में देरी जैसी चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि देशभर में RoW आवेदनों के निस्तारण का औसत समय 455 दिनों से घटकर अब मात्र 30.4 दिन रह गया है, जो वैश्विक स्तर पर एक रिकॉर्ड है। 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से 33 ने RoW पोर्टल को लागू कर लिया है, जबकि तमिलनाडु उन तीन राज्यों में शामिल है जहाँ यह अभी लागू नहीं हुआ है।

मंत्री ने कहा कि जहाँ राष्ट्रीय औसत RoW निस्तारण समय 30.4 दिन है, वहीं तमिलनाडु में यह 85 दिन है, जो लगभग तीन गुना अधिक है। उन्होंने बताया कि उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को कई पत्र लिखकर RoW पोर्टल लागू करने और नागरिक हित में अनुमतियों में तेजी लाने का अनुरोध किया है।

केरल ने स्थापित किए उच्च उपलब्धता के मानक

इसके विपरीत, मंत्री ने केरल में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की। राज्य की 978 ग्राम पंचायतों में से लगभग 100 प्रतिशत सेवा-तैयार हैं। 547 से अधिक ग्राम पंचायतों ने 98 प्रतिशत से अधिक उपलब्धता हासिल की है। सिक्स सिग्मा मानकों के अनुसार, केरल की लगभग 80 से 90 प्रतिशत ग्राम पंचायतें उच्च विश्वसनीयता मानकों पर खरी उतरती हैं, जो प्रभावी क्रियान्वयन और संचालन दक्षता को दर्शाता है।

केन्द्रीय मंत्री ने की सहयोग की अपील

सहयोग की भावना को रेखांकित करते हुए सिंधिया ने कहा कि जहाँ केन्द्र सरकार पूर्ण वित्तीय सहायता, निगरानी और मार्गदर्शन के लिए प्रतिबद्ध है, वहीं जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकारों का सक्रिय सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल सहित सभी राज्यों से रचनात्मक सहयोग की अपील की, ताकि प्रशासनिक देरी के कारण नागरिक डिजिटल कनेक्टिविटी के लाभ से वंचित न रहें।

अपने संबोधन के अंत में मंत्री ने दोहराया कि डिजिटल कनेक्टिविटी समावेशी विकास, आर्थिक सशक्तिकरण और राष्ट्रीय प्रगति की आधारशिला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतनेट और इससे जुड़ी पहलें यह सुनिश्चित कर रही हैं कि भारत की डिजिटल क्रांति हर गाँव, हर संस्थान और हर नागरिक तक पहुँचे।

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