SEBI प्रमुख Tuhin Kanta Pandey बोले Portfolio Managers के विदेशी निवेश की सीमा RBI तय करेगा

By Ankit Jaiswal | Sep 30, 2026

भारतीय निवेशकों के विदेश में पैसा लगाने को लेकर बाजार नियामक सेबी के नए फैसले के बीच उसके अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा है कि देश से बाहर कितना पैसा भेजा जा सकता है और किस तरीके से भेजा जाएगा, यह तय करने का अधिकार भारतीय रिजर्व बैंक के पास है। पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं के ग्राहकों के विदेश में निवेश पर भी यही नियम लागू होंगे।

बता दें कि सेबी के निदेशक मंडल ने 24 सितंबर को पोर्टफोलियो प्रबंधकों से जुड़े नए नियमों को मंजूरी दी थी। इन नियमों के तहत विवेकाधीन और गैर-विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधकों को कुछ तय विदेशी निवेश साधनों में पैसा लगाने की अनुमति दी गई है। इनमें विदेश में लिस्टेड कंपनियों के शेयर और ऋण साधन, रियल एस्टेट निवेश न्यास, विदेशी म्यूचुअल फंड, विनिमय कारोबार वाले कोष, इंडेक्स आधारित फंड्स और विदेशी सरकारों के ऋण पत्र शामिल हैं।

हालांकि, यह अनुमति सीधे तौर पर बिना किसी सीमा के विदेश में पैसा भेजने की छूट नहीं है। इसके लिए रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा संबंधी नियम और उदारीकृत धन प्रेषण योजना की शर्तें लागू रहेंगी। पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा के ग्राहकों के लिए विदेश में निवेश की सीमा किस तरह तय होगी, इस पर पांडे ने कोई अलग व्यवस्था नहीं बताई और इस मामले में रिजर्व बैंक की भूमिका की ओर इशारा किया।

सम्मेलन में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के पंजीकरण को आसान बनाने को लेकर भी जानकारी दी गई। पांडे ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों से जुड़े पंजीकरण दस्तावेजों को स्विफ्ट के माध्यम से जमा कराने की व्यवस्था पर विचार कर रहा है। सेबी और भारतीय रिजर्व बैंक मिलकर पंजीकरण की प्रक्रिया को तेज, आसान और पूरी तरह डिजिटल बनाने पर काम कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इस दिशा में कई कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं। इनमें एनएसडीएल का नया डिजिटल मंच, इंडिया मार्केट एक्सेस पोर्टल, ऐसा साझा आवेदन मंच जिससे आवेदन की स्थिति देखी जा सके, कागजी हस्ताक्षर की जगह डिजिटल हस्ताक्षर और इलेक्ट्रॉनिक पावर ऑफ अटॉर्नी जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इनके जरिए दस्तावेजों की नोटरी, प्रमाणित कराने और दूतावास से सत्यापन जैसी जरूरतों को कम किया जा रहा है।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की तुलना जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों से भी की गई है। इस बारे में पूछे जाने पर पांडे ने कहा कि निवेशकों को कहां पैसा लगाना है, इसका फैसला निवेशकों को ही करना है। नियामकों के लिए इस मामले में किसी बाजार को लेकर राय देना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि नियामकों का ध्यान निवेश और पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने पर है।

लिस्टेड कंपनियों की निगरानी और उनसे जुड़ी अनियमितताओं के सवाल पर पांडे ने कहा कि शेयर बाजार में लिस्टेड होने के बाद भी कंपनियों की निगरानी की जिम्मेदारी शेयर बाजारों की बनी रहती है। अगर किसी कंपनी की वास्तविक मौजूदगी या आर्थिक गतिविधि दिखाई नहीं देती है तो उसे सूची से हटाने के नियम मौजूद हैं और पहले भी ऐसी कंपनियों को सूची से हटाया गया है।

उन्होंने कहा कि ऐसी प्रक्रिया को नियमों के मुताबिक ठीक तरीके से आगे बढ़ाना जरूरी है, क्योंकि निवेशकों का भरोसा इस बात पर टिका है कि लिस्टेड कंपनियां वास्तविक कारोबार कर रही हैं। पांडे के अनुसार, शेयर बाजारों द्वारा कंपनियों की भौतिक जांच करना भी संभव है।

वहीं, गैर-लिस्टेड कंपनियों में प्रमोटरों के स्तर पर होने वाले सौदों के सवाल पर उन्होंने कहा कि सेबी को कंपनी कानून और लिस्टिंग से जुड़े नियमों के अनुरूप ही कार्रवाई करनी होगी। इससे साफ है कि नियामक विदेशी निवेश की सुविधा बढ़ाने के साथ निवेशकों की सुरक्षा और बाजार में भरोसा बनाए रखने पर भी ध्यान दे रहा है।

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