By Ankit Jaiswal | Jun 21, 2026
देश के पूंजी बाजार को अधिक मजबूत और निवेशकों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य निवेशकों की परेशानियों को कम करना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और वित्तीय क्षेत्र में पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।
बता दें कि अब कम मूल्य वाले दावों के लिए त्वरित हस्तांतरण प्रक्रिया की नई व्यवस्था लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य दस्तावेजों की संख्या कम करके दावों के निपटारे को तेज बनाना है। इसके साथ ही सरल दस्तावेजी प्रक्रिया की सीमा बढ़ा दी गई है। कुछ विशेष मामलों में स्थायी खाता संख्या जमा करने की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। सत्यापन को आसान बनाने के लिए त्वरित संकेतांक आधारित मृत्यु प्रमाण पत्र को भी स्वीकार करने का निर्णय लिया गया है।
गौरतलब है कि अब तक मृत निवेशकों की संपत्तियों के हस्तांतरण में परिवारों को लंबी कागजी प्रक्रिया और विभिन्न औपचारिकताओं का सामना करना पड़ता था। नए बदलावों से ऐसे मामलों में समय और संसाधनों की बचत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत शेयर बाजार के माध्यम से खुले बाजार में शेयर पुनर्खरीद की व्यवस्था को फिर से शुरू करने की मंजूरी दी गई है। यह व्यवस्था इस वर्ष एक अगस्त से लागू होगी। हालांकि इसके लिए नई समय-सीमा और पहले से अधिक सख्त अनुपालन नियम निर्धारित किए गए हैं ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने सामूहिक निवेश योजनाओं को भी राहत दी है। अब ऐसी योजनाओं को अस्थायी नकदी असंतुलन की स्थिति में एक ही कारोबारी दिन के भीतर अल्पकालिक उधार लेने की अनुमति होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निवेशकों के धन का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा।
वैकल्पिक निवेश कोषों के लिए भी मंजूरी प्रक्रिया को तेज किया गया है। गरुड़ व्यवस्था के अंतर्गत अब ऐसे कोषों के प्रस्तावों को मात्र दस कार्य दिवसों में स्वीकृति देने का लक्ष्य रखा गया है। इससे नए निवेश उत्पादों को बाजार में लाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी तेज हो जाएगी।
इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक की रूपरेखा के अनुरूप संरचित ऋण साधनों से जुड़े सुधारों को भी मंजूरी दी गई है। साथ ही नगर निकाय ऋण पत्र बाजार को गहराई देने के लिए पुनर्वित्त और सामूहिक वित्तपोषण जैसी नई व्यवस्थाओं को प्रोत्साहित करने का फैसला लिया गया है। इससे शहरी विकास परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाना आसान हो सकता है।
बैठक में छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए पूंजी जुटाने की व्यवस्था की समीक्षा को भी मंजूरी दी गई। वित्त वर्ष 2026-27 को ध्यान में रखते हुए इस ढांचे में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे ताकि ऐसे उद्योगों को वित्तीय संसाधन प्राप्त करने में आसानी हो सके।
बता दें कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने अपने सदस्यों और कर्मचारियों के लिए नई आचार संहिता को भी स्वीकृति दी है। इसका उद्देश्य हितों के टकराव को रोकना, जवाबदेही बढ़ाना और जानकारी के खुलासे से जुड़े नियमों को अधिक प्रभावी बनाना है।
नियामक का कहना है कि इन सभी सुधारों का मुख्य उद्देश्य निवेशकों का भरोसा मजबूत करना, बाजार की कार्यक्षमता बढ़ाना और भारत के पूंजी बाजार को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित तथा प्रतिस्पर्धी बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों का लाभ निवेशकों, उद्योगों और पूरे वित्तीय तंत्र को लंबे समय तक मिलने की संभावना है।