SEBI चेयरमैन का बड़ा ऐलान: RBI के साथ मिलकर Corporate Bond Market में लाएंगे नई क्रांति

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 02, 2026

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा है कि नियामक इस साल कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के विकास को प्राथमिकता देगा और इसके तहत उसकी भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर ‘क्रेडिट बॉन्ड सूचकांक’ तथा उनसे जुड़े डेरिवेटिव उत्पाद लाने की योजना है। सेबी चेयरमैन के तौर पर एक मार्च को एक साल पूरा करने वाले पांडेय ने पीटीआई-को दिए साक्षात्कार में कहा कि अपने कार्यकाल के दूसरे वर्ष में वह कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को मजबूत बनाने पर बहुत अधिक ध्यान देने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट बॉन्ड खंड में तरलता बढ़ाने, अधिक कंपनियों को बॉन्ड जारी करने के लिए प्रोत्साहित करने और निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है। पांडेय ने कहा कि खुदरा निवेशकों में बॉन्ड बाजार के प्रति जागरूकता सीमित है और द्वितीयक बाजार में कारोबार काफी कम है।

उन्होंने कहा, “खुदरा स्तर पर बॉन्ड बाजार के बारे में बहुत कम जानकारी है। प्राथमिक निर्गम के बाद भी लेनदेन की गतिविधि बढ़ाना हमारी प्राथमिकता है।” फिलहाल बड़ी संख्या में बॉन्ड को परिपक्वता अवधि तक रखा जाता है, जिससे बाजार में तरलता यानी नकदी की स्थिति सीमित रहती है। सेबी ने पारदर्शिता बढ़ाने और बेहतर मूल्य खोज के लिए प्राथमिक बाजार में ‘प्रस्ताव के लिए अनुरोध’ (आरएफपी) व्यवस्था और ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रदाताओं के लिए ‘कीमत का अनुरोध’ (आरएफक्यू) ढांचा लागू किया है। पांडेय ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ मिलकर क्रेडिट बॉन्ड सूचकांक और उनसे जुड़े डेरिवेटिव विकसित किए जा रहे हैं।

 उन्होंने कहा, “हम आरबीआई के साथ मिलकर क्रेडिट बॉन्ड सूचकांक और उससे जुड़े डेरिवेटिव लाने पर काम कर रहे हैं। इससे बाजार का दायरा और बढ़ेगा। बॉन्ड बाजार का भविष्य बड़ा है।” देश के कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में इस समय करीब 58 लाख करोड़ रुपये के बकाया निर्गम हैं। हालांकि 5,900 से अधिक सूचीबद्ध कंपनियों में से केवल करीब 700 कंपनियां ही बॉन्ड बाजार का इस्तेमाल कर रही हैं। इस पर सेबी प्रमुख ने कहा कि अधिक कंपनियों की भागीदारी, विभिन्न रेटिंग श्रेणियों में दोबारा निर्गम और विविध जोखिम-रिटर्न विकल्प उपलब्ध कराना मजबूत बाजार के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बाजार के विकास के लिए कंपनियों को शिक्षित करने और निवेशकों तक पहुंच बढ़ाने के समानांतर प्रयास जरूरी हैं। फिलहाल पेंशन कोष, बीमा कंपनियां और अन्य बड़े संस्थागत निवेशक इस खंड में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

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