By Ankit Jaiswal | Aug 21, 2026
भारतीय शेयर बाजार में नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम की शुरुआत के बाद जिस तरह सेंसेक्स में अचानक तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला, उसने नियामक की चिंता बढ़ा दी थी। अब इस मामले में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने बेहद तेजी से कार्रवाई करते हुए जेपी मॉर्गन की एक इकाई और स्थानीय ब्रोकरेज कंपनी के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया है।
सेबी के पूर्व बोर्ड सदस्य अश्वनी भाटिया ने इस कार्रवाई को असाधारण बताया है। उनका कहना है कि नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम में बदलाव के दौरान नियामक को किसी भी संभावित हेरफेर पर जल्दी कार्रवाई करनी जरूरी थी, ताकि बाजार में भरोसा बना रहे।
गौरतलब है कि क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम शेयर बाजार के कामकाज में हालिया बड़े बदलावों में से एक है। इसका उद्देश्य बाजार बंद होने के समय शेयरों और सूचकांकों की कीमत तय करने की प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित बनाना और इसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों के अनुरूप बनाना है। हालांकि शुरुआत के बाद से ही कुछ कारोबारियों ने इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। खास तौर पर कारोबार के आखिरी समय में सेंसेक्स में अचानक आई तेज उछाल ने बाजार की निगरानी व्यवस्था पर ध्यान खींचा था।
सेबी के 46 पन्नों के आदेश के मुताबिक, कॉप्थॉल और मानसी शेयर ने क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान ऐसे खरीद और बिक्री आदेश लगाए और बाद में उनमें से बड़ी संख्या में आदेश रद्द कर दिए। नियामक का आरोप है कि इन गतिविधियों का उद्देश्य बीएसई सेंसेक्स के संकेतात्मक संतुलन मूल्य को प्रभावित करना था। इन गतिविधियों से दोनों संस्थाओं की विकल्प सौदों से जुड़ी स्थितियों को फायदा मिलने की संभावना थी।
सेबी के अनुसार, कॉप्थॉल और मानसी शेयर ने अनुमत मूल्य सीमा के ऊपरी या निचले हिस्से के करीब बड़ी मात्रा में आदेश लगाए। बाद में उन आदेशों का बड़ा हिस्सा रद्द कर दिया गया। इससे बिना बड़ी मात्रा में वास्तविक खरीद-बिक्री हुए ही संकेतात्मक कीमत पर असर पड़ने की स्थिति बनी।
नए सिस्टम की एक खासियत ने सेबी के लिए इस तरह की गतिविधि पकड़ना आसान भी बनाया। पहले लगातार चलने वाले कारोबार के दौरान कीमतों को प्रभावित करने की कोशिशों पर नजर रखनी पड़ती थी। अब बंद होने से पहले एक निश्चित अवधि में आदेशों के लगने, बदलने और रद्द होने की प्रक्रिया पर सीधे नजर रखी जा सकती है।
सेबी के पूर्व बोर्ड सदस्य अनंत नारायण के मुताबिक, क्लोजिंग ऑक्शन एक सीमित समय वाली ऐसी प्रक्रिया है जिस पर नियामक का ध्यान ज्यादा केंद्रित हो सकता है। उनका मानना है कि नई व्यवस्था से जुड़ी शुरुआती परेशानियां समय के साथ कम हो सकती हैं।
दोनों संस्थाओं पर लगाया गया प्रतिबंध करीब 3.7 करोड़ रुपये के कथित अवैध लाभ को सेबी को लौटाने के बाद हटाया जाएगा। बता दें कि कॉप्थॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट और जेपी मॉर्गन इंडिया प्राइवेट अलग-अलग संस्थाएं हैं। इसलिए मॉरीशस स्थित इकाई पर हुई कार्रवाई का भारत में जेपी मॉर्गन की स्थानीय बैंकिंग और पूंजी बाजार गतिविधियों पर सीधे असर नहीं पड़ता है।
सेबी के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे पहले ही कह चुके हैं कि क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम को वापस लेने का सवाल नहीं है, हालांकि जरूरत के मुताबिक इसमें बदलाव किए जा सकते हैं। बाजार विशेषज्ञ धीरज रेल्ली का मानना है कि कारोबारियों को नई व्यवस्था के पूरी तरह अभ्यस्त होने में करीब एक महीने का समय लग सकता है।
बता दें कि सेबी की यह तेजी जेन स्ट्रीट समूह से जुड़े पुराने कथित बाजार हेरफेर मामले से मिले अनुभवों के बाद भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उस मामले में कार्रवाई से पहले काफी लंबी जांच चली थी। नए मामले में शुरुआती स्तर पर ही कदम उठाकर नियामक ने यह संकेत दिया है कि बाजार की नई व्यवस्था में संदिग्ध गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। अब चुनौती यह है कि नई प्रणाली में पारदर्शिता और निवेशकों का भरोसा दोनों बनाए रखते हुए बाजार को सुचारु तरीके से आगे बढ़ाया जाए, क्योंकि क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम भारतीय शेयर बाजार का स्थायी हिस्सा बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।