भारत में Satellite Internet पर Security संशय, Starlink और Jio को लाइसेंस के लिए करना होगा और लंबा इंतजार

By Ankit Jaiswal | Aug 20, 2026

सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर भारत में इंतजार अब लंबा होता जा रहा है। देश में पहली बार इस सेवा के लिए लाइसेंस जारी होने के चार साल से ज्यादा समय बाद भी व्यावसायिक शुरुआत नहीं हो पाई है। सरकारी अधिकारियों और उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह विदेशी उपग्रह कंपनियों के नेटवर्क को लेकर सुरक्षा और नियंत्रण से जुड़ी चिंताएं हैं।

इसके बावजूद पिछले कुछ महीनों से दूरसंचार विभाग की ओर से मंजूरी की स्थिति, अतिरिक्त जानकारी या स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इस कारण सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही कंपनियों का इंतजार बढ़ता जा रहा है।

बता दें कि एलन मस्क की स्टारलिंक, भारती समूह समर्थित यूटेलसैट वनवेब और जियो प्लेटफॉर्म्स की पूर्ण स्वामित्व वाली जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस इस क्षेत्र में प्रमुख कंपनियां हैं। जेफ बेजोस की कंपनी अमेजन लियो भी भारत में सेवा शुरू करने के लिए लाइसेंस की दौड़ में है।

यूटेलसैट वनवेब इंडिया को अप्रैल 2022 में वैश्विक मोबाइल व्यक्तिगत संचार उपग्रह लाइसेंस मिला था। इसके बाद अक्टूबर 2022 में जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और जून 2025 में स्टारलिंक को लाइसेंस मिला। यूटेलसैट और वनवेब का 2023 में विलय हो चुका है। इस संयुक्त कंपनी में भारती समूह के साथ फ्रांस और ब्रिटेन की सरकारों समेत कई अन्य निवेशकों की हिस्सेदारी है।

गौरतलब है कि सरकार की चिंता सिर्फ लाइसेंस देने तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के बीच हुई चर्चा में यह सवाल भी उठा है कि विदेशी कंपनियों के उपग्रह नेटवर्क पर भारत का कितना नियंत्रण रहेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने हुई एक प्रस्तुति के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने कथित तौर पर कहा कि जब तक भारत के पास इन प्रणालियों पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं हो, तब तक मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए।

इस चिंता को स्टारलिंक के ईरान युद्ध के दौरान अनुभव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे हालात में किसी विदेशी कंपनी के नियंत्रण वाले उपग्रह नेटवर्क को सीमित करना सरकारों के लिए कितना मुश्किल हो सकता है, इस पर दुनिया भर में चर्चा हुई है।

दूसरी तरफ जियो भारत के लिए अपनी अलग निम्न कक्षा वाली उपग्रह प्रणाली तैयार कर रही है। कंपनी करीब 1,600 उपग्रहों का नेटवर्क बनाने की योजना पर काम कर रही है और इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष नियामक संस्था तथा दूरसंचार विभाग से मदद मांग रही है। जियो को अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ से आवृत्ति और कक्षा से जुड़े अधिकारों के समन्वय की भी जरूरत होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक इस व्यवस्था को पूरी तरह तैयार होने में करीब तीन साल लग सकते हैं।

सरकार विदेशी और भारतीय उपग्रह कंपनियों के बीच समान समन्वय अधिकार देने की व्यवस्था पर भी विचार कर रही है, ताकि भारतीय कंपनियों पर पहले से दर्ज विदेशी उपग्रह प्रणालियों की हर स्थिति में सुरक्षा की कानूनी जिम्मेदारी न आ जाए।

हालांकि इस देरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट शुरू होने से दूरदराज के इलाकों में तेज इंटरनेट पहुंचाने के साथ उन सेवाओं को भी बढ़ावा मिल सकता है, जिनमें मोबाइल फोन सीधे उपग्रह से जुड़ सकते हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देशों में ऐसी सेवाएं पहले से उपलब्ध हैं।

ब्रिटेन के संचार नियामक कार्यालय के डेविड विल्स के मुताबिक भारत जैसे देशों को सुरक्षा और उपभोक्ता सुविधा के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। ब्रिटेन में निम्न कक्षा वाले उपग्रहों के जरिये एक लाख से ज्यादा ब्रॉडबैंड कनेक्शन मौजूद हैं। हालांकि सरकार की प्राथमिकता फिलहाल सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का जोखिम न लेने की है। ऐसे में स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो जैसी कंपनियों को भारत में सेवा शुरू करने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है और अंतिम फैसला सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की संतुष्टि के बाद ही होने की उम्मीद है।

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