सफ़ल होने के चुने हुए नुसखे (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Dec 20, 2023

सफल होने के क्या क्या नुसखे हो सकते हैं। इस सवाल के जवाब में, देसी व विदेशी लेखकों ने हज़ारों किताबों में जवाब ही जवाब लिख मारे हैं। लाखों वीडियो जब चाहें देख सकते हैं। दर्जनों चैनल, अखबार और नवीनतम डिज़ाइनर वस्त्रों और प्रभावशाली मेकअप में लिपटे, प्रवाचक और प्रवाचिकाएं अपना बना लेने वाली मुस्कराहट के साथ, नुक्ते और नुसखे बीज मंत्र की तरह वितरित कर रहे हैं। स्मार्ट सिटी, सुस्त शहर, विकसित कस्बे, पिछड़े गांव, सड़क और गली में, हर कोई हर किसी से आगे निकलने के लिए सफलता के रोचक रहस्य व तिलसिम हासिल करने की जुगाड़ में है। सफलता का आइटम गीत लिखने, गाने, नाचने व सबको दिखाकर रिझाने के लिए हम नंगे होने को भी तैयार हैं।  

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आपका तबादला नए शहर में होता है। नए अनजान पड़ोसियों से यदि सलाम नमस्ते नहीं होती, वे पानी या चाय आदि के लिए नहीं पूछते तो बुरा न मानते हुए, आप उन्हें ही चाय के साथ नमकीन बिस्कुट लेने के लिए आमंत्रित कर डालें। आप बेहद कम खर्च कर पहले ही दिन एक अच्छे पड़ोसी के रूप में स्थापित हो जाएंगे। कार्यालय पहुंच कर बिल्डिंग में ऊपर से नीचे तक सभी को मुस्कुराते हुए नमस्ते बोलने के बाद ही अपनी कुर्सी पर बैठिए। आपका व्यायाम भी हो जाएगा और सरकारी समय में, सहकर्मियों के साथ सम्बन्ध भी मज़बूत होते जाएंगे। 

दूसरों के व्यक्तिगत काम जिन पर आपका कुछ खर्च न होना हो, ज़रूर कीजिए। इससे आप डयूटी के दौरान भी इंसानी फ़र्ज़ निभाने वाले सहयोगी कहलाएंगे। आप सरकारी गाड़ी से कहीं बाहर या लोकल जा रहे हैं। आपकी पत्नी साथ नहीं जा रही है तो पड़ोसी को ज़रूर पूछ लीजिए। उन्हें लिफ्ट दे ही डालिए। इसके बदले में आप भी उनकी निजी गाड़ी में कभी कभार जा सकेंगे। कभी अपने काम के लिए बॉस से अनुमति लेने जाना हो तो ज़रूर पूछ लीजिए कि भाभीजी का कोई काम करना हो तो कृपया बताएं।

यदि आप अपनी प्रौढ़ता कम दिखाने के लिए अपने बालों या बचे खुचे बालों की डेंटिंग पेंटिंग नहीं करते तो करना शुरू कर दीजिए। कम उम्र के पड़ोसियों को बड़ा भाई या स्थानीय अभिभावक कहना शुरू कर दें। इससे छोटे मोटे कई पंगों को निबटाने में उनकी सहायता, आपको मिल सकती है। इससे आपकी परेशानियां कम रहेंगी। दो बेहद आज़माए हुए, कम चर्चित नुसखे आज ही हाथ लगे हैं। थोड़ा सा मुश्किल हैं, लेकिन बहुत उपयोगी हैं। 

नुसखा अंग्रेज़ी में है, जो बात बढ़ जाने पर शर्तिया काम आता है, ‘आइदर यू ठोको देम ऑर गेट ठोकोड’ यानी ‘उन्हें पीट दो या पिट जाओ’। दूसरा बेहद अचूक नुसखा है, ‘कनविंस कर दो या कन्फ्यूज़ कर दो’ यानी ‘यकीन दिला दो या भ्रमित कर दो’।

निजी नौकरी के अनुभव और नुसखे थोडा अलग होते हैं। अगर मैं हर चैनल पर आने वाला, सभी विषयों का विशेषज्ञ होता तो बिना जाने बूझे एक दर्जन नुसखे और बता देता।

- संतोष उत्सुक 

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