By अभिनय आकाश | Oct 06, 2026
जिसे दुनिया से अब तक सऊदी अरब और अमेरिका छुपा कर रखने की पूरी कोशिश कर रहे थे। आखिर वो कड़वा सच किसी एयर डिफेंस सिस्टम से रोका नहीं जा सका। खुद एक शीर्ष अमेरिकी सीनेटर ने रियाद की धरती पर खड़े होकर उस सच का ऐसा पर्दाफाश किया जिसने वाशिंगटन से लेकर रियाद तक हड़कंप मचा दिया है। रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हुए ईरानी ड्रोन हमले का वो भयानक सच जिसे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और डोनाल्ड ट्रंप के डर का नकाब पहनाकर दबाने की कोशिश की गई। आज पूरी दुनिया के सामने आ चुका है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने शुरुआत में पूरी दुनिया से यह झूठ बोला कि हमले से महज मामूली आग लगी और बहुत थोड़ा नुकसान हुआ। लेकिन सऊदी अरब पहुंचे अमेरिकी सेनेटर क्रिस मर्फी ने जब खुद रियाद में अमेरिकी एंबेसी परिसर के अंदर जाकर उस तबाही का मुआयना किया तो उनके होश उड़ गए। दूतावास के मलबे और खौफनाक मंजर को देखने के बाद सेनेटर मर्फी ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि ईरान के दो खतरनाक ड्रोंस ने रियाद में अमेरिकी दूतावास की धज्जियां उड़ा दी हैं।
सऊदी में मौजूद वहां आसपास के लोग लगातार इसकी वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे और यह फुटेज देखते ही देखते सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल हो गया। हालांकि इसके बाद सऊदी सरकार ने सोशल मीडिया पर ऐसे किसी भी पोस्ट को पोस्ट करने के बाद या ऐसे किसी भी वीडियो को पोस्ट करने के बाद ऐसे लोगों के खिलाफ कारवाही का एक सख्त प्रावधान बना दिया। सऊदी अरब पर होती विद्रोहियों के लगातार बढ़ते हमलों के बीच अब पश्चिम एशिया में एक बड़ा सैन्य समीकरण सामने आया है। पहली बार अगस्त में हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को जमीन पर लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान और तुर्की ने सऊदी अरब की मदद के लिए अपनी सैन्य टुकड़ियां भेजने पर सहमति जताई है। यह फैसला सोमवार को रियाद में हुई एक इमरजेंसी बैठक के बाद लिया गया है। इस बैठक में सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। पाकिस्तान की तरफ से सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, विदेश मंत्री शाकडार और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ मौजूद रहे। बैठक के बाद तीनों देशों ने एक साझा बयान जारी किया और होती विद्रोहियों के हमलों की कड़ी निंदा की। साथ ही साफ कहा गया इस तरह के हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।