By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 16, 2026
भारत रत्न से सम्मानित एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी को संगीत जगत की अप्रतिम प्रतिभा और अविवादित सुर साम्राज्ञी के तौर पर जाना जाता है। इतिहास में 16 सितंबर की तारीख संगीत की इस महान साधिका के जन्मदिन के तौर पर दर्ज है। तमिलनाडु के मदुरै शहर में 16 सितंबर, 1916 को जन्मी सुब्बुलक्ष्मी ने पांच साल की उम्र में संगीत की शिक्षा ग्रहण करनी शुरू की थी। उन्होंने देश की बहुत सी भाषाओं में गीत गाए। यह उनकी कला साधना का ही प्रभाव था कि लता मंगेशकर ने उन्हें तपस्विनी कहा, उस्ताद बड़े गुलाम अली खां ने उन्हें सुस्वरलक्ष्मी का नाम दिया, किशोरी अमोनकर उन्हें आठवां सुर कहती थीं, जो संगीत के सात सुरों से ऊंचा है। उन्हें कला क्षेत्र में योगदान के लिए 1954 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने 1998 में उन्हें भारत रत्न से अलंकृत करके उनकी कला को शीर्ष नागरिक सम्मान से नवाजा। 2021 में 16 सितंबर को ही ‘स्पेसएक्स’ अंतरिक्ष यान ने इतिहास रचा और पृथ्वी का चक्कर लगाने के लिए चार लोगों को निजी उड़ान से रवाना किया। पृथ्वी के तीन दिन तक चक्कर लगाने के लिए चार लोगों से साथ रवाना की गई ‘स्पेसएक्स’ की पहली निजी उड़ान ने कक्षा में प्रवेश किया और पहली बार ऐसा हुआ कि जब पृथ्वी का चक्कर लगा रहे अंतरिक्ष यान में मौजूद कोई भी व्यक्ति पेशेवर अंतरिक्ष यात्री नहीं था। यह यान 12 सितंबर को रवाना हुआ था। इस उड़ान का नेतृत्व ‘शिफ्ट4 पेमेंट्स इंक’ के कार्यकारी प्रबंधक, 38 वर्षीय अरबपति जारेड इसाकमैन ने किया। उनके अलावा कैंसर से उबरी हेले आर्सीनॉक्स (29), स्वीपस्टेक विजेता क्रिस सेम्ब्रोस्की (42) और एरिज़ोना में एक सामुदायिक कॉलेज के शिक्षक सियान प्रॉक्टर (51) इन मिशन में शामिल थे। आर्सीनॉक्स अंतरिक्ष में जाने वाली सबसे कम उम्र की अमेरिकी बन गईं। वह किसी कृत्रिम अंग के साथ अंतरिक्ष में जाने वाली पहली शख्स भी थीं। उनके बाएं पैर में टाइटेनियम रॉड पड़ी है। यह ‘स्पेसएक्स’ के संस्थापक एलन मस्क द्वारा अंतरिक्ष में पर्यटकों के रूप में भेजा गया पहला समूह था। अंतरिक्ष को पर्यटन के लिए इस्तेमाल करने का पहले विरोध करने वाले नासा ने भी बाद में इसका समर्थन किया। देश-दुनिया के इतिहास में 16 सितंबर की तारीख पर दर्ज अन्य प्रमुख घटनाएं इस प्रकार है :-